हिन्दू मेघदूत विमर्श | Hindu megdutam vimarsh

- श्रेणी: धार्मिक / Religious नाटक/ Drama हिंदू - Hinduism
- लेखक: अज्ञात - Unknown
- पृष्ठ : 406
- साइज: 5 MB
- वर्ष: 1921
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दो शब्द :
इस पाठ में कालिदास के प्रसिद्ध काव्य "मेघदूत" का परिचय और उसकी विशेषताओं का वर्णन किया गया है। "मेघदूत" एक प्रेमकविता है, जिसमें यक्ष द्वारा अपनी प्रिय के प्रति विरह की भावना व्यक्त की गई है। काव्य में प्राकृतिक सौंदर्य, विभिन्न स्थलों का वर्णन और प्रेम की गहराई को दर्शाया गया है। कवि ने यक्ष के माध्यम से प्रकृति के अद्भुत दृश्य और भावनाओं की गहराई को चित्रित किया है। इसमें विभिन्न ऋतुओं, विशेषकर वर्षा ऋतु, के गुणों का उल्लेख किया गया है। यह काव्य न केवल प्रेम और विरह का प्रतीक है, बल्कि इसमें भारतीय संस्कृति और प्रकृति के प्रति सम्मान भी झलकता है। पाठ में यह भी बताया गया है कि "मेघदूत" का काव्य शास्त्र में विशेष स्थान है और इसे शिक्षा का एक महत्वपूर्ण स्रोत माना गया है। कालिदास की प्रतिभा और काव्य की संरचना को सराहा गया है, जो इसे अन्य काव्यों से अलग बनाती है। पाठ में कवि के व्यक्तित्व और उनकी काव्यशक्ति की प्रशंसा की गई है, और यह उल्लेख किया गया है कि "मेघदूत" में प्रेम की निरंतरता और उसकी आध्यात्मिकता की गहराई को दर्शाने वाली विशेषताएँ हैं। अंत में, यह कहा गया है कि "मेघदूत" ने न केवल भारतीय साहित्य में, बल्कि विश्व स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई है और इसे प्रेम और विरह के आदर्श उदाहरण के रूप में देखा जाता है।
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