जातक कथा | JATAK KATHA

- श्रेणी: Magic and Tantra mantra | जादू और तंत्र मंत्र Speech and Updesh | भाषण और उपदेश कहानियाँ / Stories दार्शनिक, तत्त्वज्ञान और नीति | Philosophy बौद्ध / Buddhism
- लेखक: भदंत आनंद कौसल्यायन - Bhadant Aanand Kausalyayan
- पृष्ठ : 218
- साइज: 6 MB
- वर्ष: 1947
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दो शब्द :
इस पाठ में बौद्ध साहित्य के त्रिपिटक के विभिन्न हिस्सों का विवरण दिया गया है। त्रिपिटक में तीन मुख्य भाग होते हैं: सुत्तपिटक, विनयपिटक और अभिधम्मपिटक। सुत्तपिटक में पांच निकाय शामिल हैं, जिनमें दीघनिकाय, संकिसनिकाय, संयुत्तनिकाय, अंगुत्तरनिकाय और खुहदकनिकाय शामिल हैं। खुहदकनिकाय के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण ग्रंथ जैसे धम्मपद, जातक, और थेरगाथा हैं। पाठ में जातक कथाओं का विशेष उल्लेख किया गया है, जो बुद्ध के पूर्वजन्मों की कथाएँ हैं और बोधिसत्व के विकास को दर्शाती हैं। जातक का अर्थ जन्म से जुड़ा हुआ है और इसमें बुद्ध के 550 पूर्वजन्मों की कहानियों का समावेश है। जातक कथाएँ बौद्ध धर्म के नैतिक शिक्षाओं को प्रस्तुत करती हैं और इनमें जीवन के विभिन्न पहलुओं को समझाया गया है। पाठ में यह भी बताया गया है कि जातक कथाओं की संख्या, उनके विकास, और उनके विभिन्न रूपों के बारे में विवाद है। कुछ विद्वानों का मानना है कि जातक कथाएँ लगभग दो हजार वर्ष पुरानी हैं और ये बौद्ध धर्म के मूल तत्वों को दर्शाती हैं। अंत में, पाठ में यह भी उल्लेख किया गया है कि जातक कथाएँ बौद्ध साहित्य के अन्य हिस्सों के साथ साझा विशेषताएँ रखती हैं, और इनका महत्व बौद्ध धर्म की नैतिकता और शिक्षाओं को समझने में है।
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