सत्यार्थ प्रकाश | Styarth prakash

- श्रेणी: Magic and Tantra mantra | जादू और तंत्र मंत्र ज्योतिष / Astrology दार्शनिक, तत्त्वज्ञान और नीति | Philosophy धार्मिक / Religious हिंदू - Hinduism
- लेखक: दयानंद सरस्वती - Dayanand Saraswati
- पृष्ठ : 633
- साइज: 33 MB
- वर्ष: 1912
-
-
Share Now:
दो शब्द :
इस पाठ में भारतीय संस्कृति, धर्म, और वेदों के महत्व पर चर्चा की गई है। इसमें आत्मा, परमात्मा, और ईश्वर के विभिन्न नामों और गुणों का वर्णन किया गया है। पाठ में यह बताया गया है कि ईश्वर का नाम "सत्य" है, क्योंकि वह सब कुछ प्रकट करने वाला है और सम्पूर्ण जगत का आधार है। इसके अलावा, ईश्वर की परिभाषा में यह भी कहा गया है कि वह सभी जीवों का अन्तर्यामी है और उनके भीतर मौजूद है। पाठ में यह भी उल्लेख किया गया है कि मनुष्य जाति में विभिन्न मत और विचारधाराएं हैं, और सभी को एक दूसरे के प्रति सहिष्णु रहना चाहिए। इसके माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि मतभेदों के बावजूद, सभी मानवों का उद्देश्य सत्य की खोज करना और एक-दूसरे का सम्मान करना होना चाहिए। इसके अलावा, पाठ में विभिन्न देवताओं और उनके गुणों का भी वर्णन किया गया है, जैसे "सविता," "देव," और "कुबेर," जो ईश्वर की विशेषताओं को उजागर करते हैं। अंत में, यह कहा गया है कि यह ग्रंथ उन लोगों के लिए लिखा गया है जो सत्य और ज्ञान की खोज में हैं, और इसका उद्देश्य सभी को सही मार्ग दिखाना है। सारांशतः, यह पाठ धर्म, संस्कृति और मानवता के बीच सामंजस्य स्थापित करने का प्रयास करता है, और सभी को एक साथ मिलकर सत्य की खोज करने के लिए प्रेरित करता है।
Please share your views, complaints, requests, or suggestions in the comment box below.