दक्षिण भारत का इतिहास | History of south India

By: डॉ. एच. एन. दुबे - Dr. H. N. Dube


दो शब्द :

दक्षिण भारत का बृहद्‌ इतिहास, डॉ. हरि नारायण दुबे द्वारा लिखित, दक्षिण भारतीय इतिहास और संस्कृति का सम्यक् अध्ययन प्रस्तुत करता है। यह पुस्तक ईसा की 7वीं से 5वीं शताब्दी के बीच के समय को संदर्भित करती है। लेखक ने दक्षिण भारत के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक पहलुओं को विस्तार से वर्णित किया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि दक्षिण भारत भारतीय इतिहास का एक अभिन्न अंग है। पुस्तक में दक्षिण भारत की भौगोलिक रचना, प्राचीन साहित्य, पुरातात्विक साक्ष्य, और संगम युग के समाज की विशेषताएँ शामिल हैं। संगम साहित्य का महत्व और उसमें वर्णित सामाजिक जीवन, वर्गभेद, स्त्रियों की स्थिति, विवाह परंपराएँ, और खान-पान की आदतें भी पुस्तक में समाहित हैं। चालुक्य वंश का इतिहास और उनके शासन के दौरान सांस्कृतिक विकास पर भी प्रकाश डाला गया है। लेखक ने यह दर्शाया है कि किस प्रकार दक्षिण भारत में विभिन्न राजवंशों के बीच संघर्ष और गुटबंदी का वातावरण बना रहता था। साथ ही, सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक विकास के विभिन्न पहलुओं को भी समझाया गया है। पुस्तक का उद्देश्य छात्रों और शोधकर्ताओं को दक्षिण भारत के इतिहास की एक संक्षिप्त लेकिन समर्पित जानकारी प्रदान करना है। लेखक ने अपने अध्ययन में विभिन्न पूर्व रचनाकारों और विद्वानों का योगदान स्वीकार किया है। पुस्तक का लेखन सरल और सुलभ भाषा में किया गया है, जिससे यह हिंदी भाषी पाठकों के लिए उपयोगी बनती है। इस प्रकार, डॉ. दुबे की यह कृति दक्षिण भारतीय इतिहास के अध्ययन में एक महत्वपूर्ण स्त्रोत के रूप में उभरती है, जो न केवल विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए, बल्कि सामान्य पाठकों के लिए भी ज्ञानवर्धक है।


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