जैन तंत्र शास्त्र | Jain tantra shastra

By: यतीन्द्र कुमार जैन - Ytindra kumar Jain


दो शब्द :

इस पाठ में जैन धर्म के तीन महत्वपूर्ण ग्रंथों का संकलन किया गया है, जिनमें चतुविशतितोर्थकर अनाहत मन्त्र-यन्त्र विधि, श्री कल्याण मन्दिर स्तोत्र, और भवतामर स्तोत्र शामिल हैं। इन ग्रंथों में संबंधित मंत्र, यन्त्र, उनकी साधना विधि, और ग्रभावादि का उल्लेख किया गया है। लेखक पं. राजेश दीक्षित ने इन ग्रंथों का संग्रहित और संपादित किया है, जिसमें पहले से उपलब्ध ग्रंथों का हिंदी अनुवाद भी शामिल है। जैन धर्म के दोनों सम्प्रदायों, श्वेतांबर और दिगम्बर, ने इन ग्रंथों को मान्यता दी है और यह साधना के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। साधना के लिए मंत्र-यन्त्रों की विधि और उनके उपयोग के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है। पाठ में यह भी बताया गया है कि मंत्र और यन्त्र साधना का मुख्य उद्देश्य आत्मज्ञान की प्राप्ति है, और इसे विभिन्न धार्मिक सम्प्रदायों में भी अपनाया गया है। अंत में, पाठ में मंत्र-यन्त्र साधना के लिए कुछ आवश्यक निर्देश दिए गए हैं, जैसे कि गुरु से मंत्र ग्रहण करना, श्रद्धा रखना, शुद्ध स्थान पर साधना करना आदि। पाठ का उद्देश्य साधकों को सही विधि से मंत्र-यन्त्र की साधना करने में मदद करना है।


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