भारत की संविधानिक विधि | Bharat ki sanwidhanik Vidhi

By: दुर्गादास बसु - Durgadas Basu


दो शब्द :

यह पाठ "भारत की सांविधानिक विधि" पर आधारित है, जिसे दुगदास बसु द्वारा लिखा गया है। इसमें भारत के संविधान की संरचना, नागरिकता, मौलिक अधिकार, संघ, कार्यपालिका, संसद, न्यायपालिका, और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के कर्तव्यों एवं शक्तियों का विस्तृत वर्णन किया गया है। पाठ में भारत के संविधान की विभिन्न धाराओं और भागों का उल्लेख किया गया है, जो देश के प्रशासनिक ढांचे को स्थापित करने में मदद करते हैं। इसमें मूल अधिकारों की व्याख्या की गई है, जो भारतीय नागरिकों को कानून के समक्ष समानता, स्वतंत्रता, शोषण के विरुद्ध अधिकार, धर्म की स्वतंत्रता, और संस्कृति व शिक्षा से संबंधित अधिकार प्रदान करते हैं। संविधान का यह अध्ययन संघ और उसके कार्यपालिका, संसद, और न्यायपालिका के मध्य संबंधों को स्पष्ट करता है। इसके अंतर्गत राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, मंत्रिपरिषद, और संसद के कार्यों का विवरण भी शामिल है। पाठ में नागरिकों के कर्तव्यों और संविधान के प्रति उनकी जिम्मेदारियों का भी उल्लेख किया गया है। कुल मिलाकर, यह पाठ भारत की सांविधानिक विधि के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं का सारांश प्रस्तुत करता है, जो भारतीय लोकतंत्र की नींव को मजबूत बनाते हैं।


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