रामचरितमानस में रोग तथा उनकी चिकित्सा | Ramcharit manas mein rog aur unki Chikitsa

By: विजयपाल सिंह - Vijaypal Singh
रामचरितमानस में रोग तथा उनकी चिकित्सा | Ramcharit manas mein rog aur unki Chikitsa by


दो शब्द :

यह शोधप्रबंध रामचरितमानस में वर्णित मानसिक रोगों और उनकी चिकित्सा पर आधारित है। वर्तमान समय में मानसिक रोगों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है, और यह समस्या केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी समान रूप से फैली हुई है। आधुनिक चिकित्सा पद्धतियाँ मानसिक रोगों के उपचार में असफल साबित हो रही हैं, जिसके कारण पुरानी चिकित्सा पद्धतियों की ओर ध्यान दिया जा रहा है। रामचरितमानस, जिसे गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा है, मानसिक रोगों का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है। इसमें विभिन्न मानसिक विकारों का वर्णन और उनके उपचार के उपाय प्रस्तुत किए गए हैं। शोध का उद्देश्य यह है कि इस अद्भुत ग्रंथ में वर्णित मानसिक रोगों की चिकित्सा विधियों को समझा जाए ताकि प्रभावित व्यक्ति लाभ उठा सकें। शोधप्रबंध के विभिन्न अध्यायों में मानसिक रोगों की अवधारणा, उनके लक्षण, और रामचरितमानस में वर्णित उपचार विधियों का विस्तृत विश्लेषण किया गया है। पहले अध्याय में मानसिक रोगों की परिभाषा और उनकी वर्गीकरण की चर्चा की गई है। दूसरे अध्याय में मानसिक रोगों के स्वरूप और उनके उपचार के लिए आयुर्वेदिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया है। तीसरे अध्याय में रामचरितमानस में वर्णित मानसिक रोगों की विशेषताएँ और उनके उपचार के तरीके पर प्रकाश डाला गया है। अंत में, शोधप्रबंध का निष्कर्ष प्रस्तुत किया गया है, जिसमें मानसिक रोगों की चिकित्सा के लिए रामचरितमानस के उपयोग की संभावनाओं का विश्लेषण किया गया है। यह प्रबंध न केवल मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण है, बल्कि यह आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के साथ पारंपरिक ज्ञान के समन्वय की आवश्यकता को भी दर्शाता है।


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