आधुनिक चिकित्सा शास्त्र | Modern ayurvedic medicine

By: धर्मदत्त वैध - Dharmdatt Vaidh
आधुनिक चिकित्सा शास्त्र | Modern ayurvedic medicine by


दो शब्द :

इस पाठ का मुख्य विषय आधुनिक चिकित्सा शास्त्र और इसके अंतर्गत आयुर्वेद का महत्व है। आयुर्वेद में शरीर के तीन मूल तत्व – वात, पित्त, और कफ – का विश्लेषण किया गया है। ये तीनों तत्व शरीर के स्वास्थ्य को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पित्त तत्व का बढ़ना विभिन्न रोगों का कारण बन सकता है, जैसे ज्वर, दाह, और रक्तक्षय। पित्त की वृद्धि का उपचार विश्राम, सुपाच्य आहार, और विशेष औषधियों के माध्यम से किया जाता है। कफ तत्व शरीर के विकास और स्थिरता में योगदान देता है। इसके संतुलन पर स्वास्थ्य निर्भर करता है। कफ और पित्त के संतुलन को बनाए रखना आवश्यक है, क्योंकि यदि एक तत्व की वृद्धि होती है और दूसरा कम होता है, तो स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। आयुर्वेद में यह भी बताया गया है कि कफ की वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए हल्का और गर्म आहार, शारीरिक श्रम, और स्वेदन आदि का उपयोग किया जाना चाहिए। इसके अलावा, पाठ में यह भी बताया गया है कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर वायुतत्त्व का प्रभाव होता है। वायुरोग उस स्थिति को कहते हैं जब शरीर में वायुतत्त्व की कमी होती है, जिससे कमजोरी और अन्य लक्षण उत्पन्न होते हैं। वायुरोग का उपचार भी उचित आहार और जीवनशैली के माध्यम से किया जाता है। इस प्रकार, आयुर्वेद में प्राकृतिक उपचार विधियों का महत्व बताया गया है, जो शरीर के तत्वों के संतुलन को बनाए रखते हैं और स्वास्थ्य को प्रोत्साहित करते हैं।


Please share your views, complaints, requests, or suggestions in the comment box below.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *