मंत्र योग संहिता | mantra Yoga Sanhita

- श्रेणी: Magic and Tantra mantra | जादू और तंत्र मंत्र योग / Yoga
- लेखक: स्वामी विवेकानंद - Swami Vivekanand
- पृष्ठ : 174
- साइज: 3 MB
- वर्ष: 1925
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दो शब्द :
इस पाठ में यह बताया गया है कि भारतीय संस्कृति और धर्म की पुष्टि के लिए आवश्यक है कि शुद्ध हिंदी भाषा में महत्वपूर्ण साहित्य का प्रकाशन किया जाए। जब तक हमारे आध्यात्मिक ग्रंथ, जो संस्कृत में हैं, को शुद्ध हिंदी में अनुवादित नहीं किया जाता और उपयोगी ग्रंथ हिंदी में नहीं लिखे जाते, तब तक हिंदू जाति का वास्तविक रूप प्रकट करना असंभव है। इसलिए, एक स्वतंत्र कार्य विभाग द्वारा कई ग्रंथों का प्रकाशन किया जा रहा है। इन ग्रंथों का उद्देश्य सनातन धर्म की पुष्टि करना, साम्प्रदायिक विरोध को समाप्त करना और अन्य धर्मों के आक्रमणों से रक्षा करना है। इसके लिए, विभिन्न योगों के सिद्धांतों को प्रकाशित करने की योजना बनाई गई है, जैसे मन्त्रयोग, ध्याणयोग, लययोग और राजयोग। इन ग्रंथों के माध्यम से सभी सम्प्रदायों को कल्याण हो सकेगा। पाठ में यह भी कहा गया है कि दर्शनशास्त्र की उन्नति से समाज की उन्नति संभव है और यह बताया गया है कि कैसे विभिन्न दार्शनिक प्रणाली जैसे न्याय, वेदान्त, सांख्य, योग आदि को समझना और प्रचारित करना आवश्यक है। इसके साथ ही, वर्तमान समय में इन दार्शनिक दृष्टिकोणों का अभाव और शिक्षाप्रणाली में कमी के कारण सनातन धर्म की दुर्गति हो रही है। अंततः, पाठ में यह स्पष्ट किया गया है कि सच्चे ज्ञान और शिक्षा के माध्यम से ही धर्म और समाज का कल्याण संभव है।
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