आधुनिक मनोविज्ञान | Aadhunik Manovigyan

By: लालजीराम शुक्ल - Laljiram Shukl
आधुनिक मनोविज्ञान | Aadhunik Manovigyan by


दो शब्द :

इस पाठ में मनोविज्ञान के महत्व और उसके विकास पर चर्चा की गई है। लेखक का मानना है कि वर्तमान समय में मनोविज्ञान के अध्ययन में रुचि बढ़ रही है, विशेषकर भारत में, जहां युवा वर्ग अपने ज्ञान को बढ़ाने के प्रयास में है। उन्होंने ज्ञान के दो प्रकारों का उल्लेख किया: बाह्य जगत से संबंधित ज्ञान और आंतरिक ज्ञान। दोनों प्रकार के ज्ञान का समुचित विकास मनुष्य के लिए आवश्यक है। भारत की प्रवृत्ति को अंतर्मुखी बताया गया है, जहां विद्वानों ने आंतरिक विषयों का गहन अध्ययन किया है, जबकि पश्चिमी देशों ने बाह्य विषयों पर ध्यान केंद्रित किया है। लेखक ने बताया कि भारत में एक नई जागृति आई है, जिसके परिणामस्वरूप राजनीतिक स्वतंत्रता प्राप्त हुई है। मनोविज्ञान को एक विज्ञान के रूप में प्रस्तुत करते हुए लेखक ने उल्लेख किया है कि इसका अध्ययन प्रयोगों के आधार पर किया जाना चाहिए, न कि केवल सिद्धांतों के आधार पर। आधुनिक मनोविज्ञान के जन्मदाता सिगमंड फ्रायड के विचारों का भी विश्लेषण किया गया है, जिनका योगदान मानव समाज की सांस्कृतिक जीवन में महत्वपूर्ण है। हालांकि, लेखक ने फ्रायड के विचारों में एकाग्रता की कमी की भी बात की है और चार्ल्स युंग जैसे अन्य विद्वानों के योगदान को भी रेखांकित किया है। पुस्तक में मन के स्वरूप, उसकी शक्तियों, मानसिक प्रतिक्रियाओं, मानसिक विकास, विक्षिप्तता, मानसिक रोगों और उनकी चिकित्सा के उपायों पर विचार किया गया है। लेखक ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए मनोविज्ञान के अध्ययन के विभिन्न पहलुओं को सरल भाषा में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। अंत में, लेखक ने अपने सहयोगियों और मार्गदर्शकों के प्रति आभार व्यक्त किया है, जिन्होंने इस पुस्तक के लेखन में उनका समर्थन किया। यह पुस्तक न केवल मनोविज्ञान के सिद्धांतों को समझने में सहायक होगी, बल्कि भारतीय संदर्भ में मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं को भी सुलझाने में मदद करेगी।


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