यास्क का निरुक्त | NIRUKTA OF YASKA

By: उमाशंकर - Umashankar


दो शब्द :

इस पाठ में भारतीय साहित्य, विशेष रूप से वेदों और निरुक्त की महत्वता को समझाया गया है। लेखक ने यह स्पष्ट किया है कि वेद संसार का सबसे प्राचीन साहित्य है और इसकी महत्ता भारतीय संस्कृति में बहुत अधिक है। वेदों का मौखिक रूप से संरक्षण किया गया है और उनकी प्रतिष्ठा को बनाए रखने के लिए अनेक प्रयास किए गए हैं। लेखक ने निरुक्त की उपयोगिता और इसके अध्ययन के महत्व को भी रेखांकित किया है। निरुक्त, शब्दों के अर्थों और व्याख्या का संग्रह है, जो न केवल वेदों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, बल्कि इसने भारतीय भाषाशास्त्र में भी एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त किया है। पाठ में यास्क का भी उल्लेख किया गया है, जो निरुक्त का लेखक है और जिसने भारतीय भाषाशास्त्र में अद्वितीय योगदान दिया है। इसके साथ ही, लेखक ने अनुवाद के कार्य की कठिनाईयों को भी बताया है, जिसमें प्राचीन भाषा और आधुनिक युग की भाषा में अंतर को समझना शामिल है। अंत में, लेखक ने अपने पाठकों से अपेक्षाएँ व्यक्त की हैं कि वे इस पुस्तक को पढ़ें और इसमें दी गई जानकारी को समझें। उन्होंने अनुवाद के दौरान हुई कठिनाइयों और पाठ में मौजूद अशुद्धियों के लिए क्षमा भी मांगी है। इस प्रकार, पाठ भारतीय साहित्य के महत्व और निरुक्त के अध्ययन की आवश्यकता को उजागर करता है।


Please share your views, complaints, requests, or suggestions in the comment box below.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *