स्कंदगुप्त विक्रमादित्य | Skandgupt Vikramaditya

By: जयशंकर प्रसाद - jayshankar prasad
स्कंदगुप्त विक्रमादित्य  | Skandgupt Vikramaditya by


दो शब्द :

इस पाठ में हिंदी साहित्य के महान नाटककार श्री जयशंकर प्रसाद के नाटकों की महत्ता और उनकी कल्पनाशीलता का उल्लेख किया गया है। बताया गया है कि उनके नाटक न केवल साहित्य में मूल्यवान रत्न जोड़ते हैं, बल्कि हमारे इतिहास का पुनर्निर्माण भी करते हैं। विशेष रूप से महाभारत काल से लेकर गुप्त काल तक के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाक्रमों को उन्होंने अपने नाटकों में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है। गुप्तकाल का वर्णन करते हुए, स्कंदगुप्त के चरित्र की महत्ता को दर्शाया गया है। स्कंदगुप्त एक साहसी और धैर्यवान नेता के रूप में उभरते हैं, जो अपने साम्राज्य की रक्षा के लिए संकल्पित हैं। पाठ में युद्ध के संदर्भ में अपने अधिकारों के प्रति उनकी जागरूकता और जिम्मेदारी का भी उल्लेख है। साथ ही, उनके संवाद में साम्राज्य की चुनौतियों और शत्रुओं के आक्रमण के प्रति सजग रहने की आवश्यकता को दर्शाया गया है। इस नाटक में विभिन्न पात्रों के माध्यम से गुप्त साम्राज्य की स्थिति, आंतरिक संघर्ष, और बाहरी आक्रमणों का सामना करने की चुनौतियों को है। यह पाठ न केवल ऐतिहासिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है, बल्कि मानवीय भावनाओं और रिश्तों की गहराई को भी उजागर करता है। स्कंदगुप्त का चरित्र एक साहसी योद्धा और विचारशील शासक के रूप में उभरता है, जिसका उद्देश्य अपने राज्य और प्रजा की रक्षा करना है।


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