धन्वन्तरि वनोषधि | Dhanvantri Vanoshdhi

By: वैधाचार्य उदयलाल महात्मा - Vaedhachaarya Udaylal Mahatma
धन्वन्तरि वनोषधि  | Dhanvantri Vanoshdhi by


दो शब्द :

इस पाठ में मुख्य रूप से वनौषधि-विज्ञान और संबंधित साहित्य की प्रकाशन से जुड़ी जानकारियाँ दी गई हैं। विशेष सम्पादक डा. उदयालाल जी ने पाठकों को बताया है कि यदि पहले भाग को पसंद किया गया, तो आने वाले भागों को भी समय-समय पर प्रकाशित किया जाएगा। पहले भाग को पाठकों ने सराहा है और इसके आगे के भागों की मांग की गई है। लेख में यह भी उल्लेख किया गया है कि वनौषधि-विशेषांक का यह नया भाग पाठकों के सामने प्रस्तुत किया जा रहा है। इसके साथ ही, पाठकों से निवेदन किया गया है कि वे इस साहित्य को अधिक से अधिक फैलाने में मदद करें, ताकि और भी अधिक उपयोगी सामग्री उपलब्ध कराई जा सके। इसके अलावा, पाठ में विभिन्न वनस्पतियों का उल्लेख किया गया है और बताया गया है कि कैसे स्थानीय चिकित्सक और विद्वान इसका प्रयोग कर सकते हैं। पाठ में इन्जेक्शन के उपयोग के संदर्भ में भी जानकारी दी गई है, जिसमें बताया गया है कि कब इन्जेक्शन का प्रयोग करना चाहिए। अंत में, पाठ में पाठकों को नए ग्राहक बनने के लिए आमंत्रित किया गया है और उन्हें प्रोत्साहित किया गया है कि वे पहले भाग की प्रति प्राप्त करें। प्रकाशित होने वाले नए विशेषांक और विषयों की जानकारी भी साझा की गई है, जिससे पाठकों को आगे की सामग्री की प्रतीक्षा रहेगी।


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