अंतरराष्ट्रीय संबंध (द्वितीय विश्वयुद्ध से अद्यतन) | International relation (Updated from World War II)

By: पुष्पेश पंत - Pushpesh Pant


दो शब्द :

यह पाठ "अंतर्राष्ट्रीय संबंध" विषय पर केंद्रित है, जिसमें द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की वैश्विक राजनीति और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के अध्ययन की महत्वता पर चर्चा की गई है। लेखक ने इस बात पर जोर दिया है कि आज के समय में, कोई भी स्वतंत्र राष्ट्र वैश्विक घटनाओं से अज्ञात नहीं रह सकता, और इसलिए अंतर्राष्ट्रीय संबंधों का अध्ययन आवश्यक है। पुस्तक में यह बताया गया है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, अंतर्राष्ट्रीय राजनीति का स्वरूप पूरी तरह से बदल गया है। यह युद्ध मानव जाति के इतिहास की एक निर्णायक घटना है, जिसने यह दर्शाया कि सभी देशों की नियति एक-दूसरे से जुड़ी हुई है। लेखक का मानना है कि इस विषय पर अध्ययन करने के लिए हिंदी में सामग्री की कमी है, जिसे इस पुस्तक के माध्यम से पूरा करने का प्रयास किया गया है। पुस्तक में विभिन्न अध्यायों के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं का विस्तार से विश्लेषण किया गया है, जिसमें द्वितीय विश्व युद्ध, शीत युद्ध, क्षेत्रीय संगठन, गुटनिरपेक्षता, और भारत की विदेश नीति जैसे विषय शामिल हैं। लेखक ने पाठ्य सामग्री को रोचक और पठनीय बनाने का प्रयास किया है, ताकि छात्र और प्रतियोगी परीक्षाओं के उम्मीदवार इसे आसानी से समझ सकें। इस प्रकार, यह पुस्तक हिंदी भाषी छात्रों और अन्य पाठकों के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन है, जो अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के अध्ययन में उनकी सहायता करेगी।


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