मर्म-विज्ञान | Heart science

By: पं रामरक्ष पाठक - Pt. Ramraksh Pathak


दो शब्द :

इस पाठ में मर्म-विज्ञान का विस्तृत वर्णन किया गया है, जिसमें मानव शरीर के विभिन्न मर्म स्थानों की संख्या, उनके नाम और स्थानों का उल्लेख किया गया है। लेखक ने बताया है कि मानव शरीर में चार प्रमुख शाखाएँ हैं, और प्रत्येक शाखा में मर्म स्थानों की संख्या अलग-अलग होती है। मर्मों की पहचान और उनकी विशेषताओं का वर्णन करते हुए यह बताया गया है कि ये मर्म स्थान शरीर की संरचना और स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं। पाठ में मांस, सिरा, स्नायु, अस्थि, और संधि मर्मों की कुल संख्या 107 बताई गई है। हर एक प्रकार के मर्म का नाम, संख्या और उनके स्थान का विवरण प्रस्तुत किया गया है। मर्मों के प्रति संवेदनशीलता के कारण, इन्हें चोट लगने पर गंभीर चिकित्सा संबंधी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं, जैसे दर्द, रक्तस्राव, और संभवतः मृत्यु भी। लेखक ने यह भी स्पष्ट किया है कि मर्म स्थानों पर चोट लगने से शरीर में वायु का प्रवाह प्रभावित होता है, जिससे तीव्र पीड़ा होती है और शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली बाधित होती है। चिकित्सकों के लिए यह आवश्यक है कि वे मर्म स्थानों की पहचान कर सही उपचार करें ताकि मरीज को राहत मिल सके। इस प्रकार, इस पाठ में मर्म-विज्ञान के विभिन्न पहलुओं का समावेश किया गया है, जो आयुर्वेद के दृष्टिकोण से मानव शरीर की संरचना और स्वास्थ्य को समझने में सहायक है।


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