बुद्ध दर्शन | Budda Darshan

- श्रेणी: ग्रन्थ / granth दार्शनिक, तत्त्वज्ञान और नीति | Philosophy धार्मिक / Religious बौद्ध / Buddhism हिंदू - Hinduism
- लेखक: बलदेव उपाध्याय - Baldev upadhayay
- पृष्ठ : 586
- साइज: 40 MB
- वर्ष: 1946
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दो शब्द :
इस पाठ में बौद्ध दर्शन, विशेषकर बौद्ध धर्म के अष्टांगिक मार्ग का विवेचन किया गया है। लेखक पं. बलदेव उपाध्याय ने बौद्ध धर्म के मूल सिद्धांतों और उनके प्रामाणिक विवेचन पर ध्यान केंद्रित किया है। अष्टांगिक मार्ग में सम्यक् दृष्टि, सम्यक् संकल्प, सम्यक् वचन, सम्यक् कर्म, सम्यक् आजीविका, सम्यक् व्यायाम, सम्यक् स्मृति, और सम्यक् समाधि शामिल हैं। इन सभी तत्वों का उद्देश्य मानव जीवन में सही दिशा और उद्देश्य प्रदान करना है। सम्यक् दृष्टि का अर्थ है ज्ञान, जिसमें व्यक्ति को कुशल और अकुशल कर्मों का ज्ञान होना चाहिए। सम्यक् संकल्प का तात्पर्य निष्कामता और अहिंसा से है। सम्यक् वचन में सत्य बोलने और कटु वचनों से बचने पर जोर दिया गया है। सम्यक् कर्म का महत्व इस बात में निहित है कि कर्मों का फल ही मानव की सुख-दुःख की स्थिति को निर्धारित करता है। सम्यक् आजीविका का अर्थ है सच्ची जीविका अपनाना, जिसमें दूसरों को नुकसान न पहुँचे। सम्यक् व्यायाम में सत्कर्मों के प्रति प्रयत्नशील रहना और बुरी भावनाओं को नियंत्रित करना आवश्यक है। सम्यक् स्मृति में अपने विचारों और भावनाओं का सही अवलोकन करना शामिल है। अंत में, पाठ में यह बताया गया है कि बौद्ध धर्म का मुख्य उद्देश्य मानव को उसके कर्मों के प्रति जागरूक करना और उसे सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करना है, ताकि वह अंततः निर्वाण की प्राप्ति कर सके।
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