व्याकरण महाभाष्य | vyakaran Mahabhishya

By: श्री चारुदेव शास्त्री - Shri Charudev Shastri
व्याकरण महाभाष्य | vyakaran Mahabhishya by


दो शब्द :

इस पाठ में भगवत्पतञ्जलि द्वारा रचित "ज्यकर्स-महाभल्य" ग्रंथ का हिंदी में अनुवाद और व्याख्या प्रस्तुत की गई है। अनुवादक चारुदेव शास्त्री ने इसकी महत्ता और जटिलता को समझाते हुए यह बताया है कि भाष्य का अर्थ समझना आसान नहीं होता। वे कहते हैं कि महाभाष्य में गहराई और रचनात्मक सौंदर्य है, जिसे सरल भाषा में समझाना आवश्यक है, खासकर उन लोगों के लिए जो संस्कृत में दक्ष नहीं हैं। शास्त्री ने यह भी उल्लेख किया है कि प्राचीन विद्वानों के व्याख्यान आज की दृष्टि में जटिल हो गए हैं, इसलिए उन्होंने अनुवाद करते समय भाष्य के अर्थ को स्पष्ट करने का प्रयास किया है। उन्होंने विभिन्न उद्धरणों और संदर्भों का उपयोग करके भाषा के अर्थ को उजागर किया है। इसके अलावा, उन्होंने यह भी बताया है कि उनके अनुवाद का उद्देश्य केवल शब्दों का अनुवाद नहीं बल्कि उनके अर्थों और संदर्भों को भी स्पष्ट करना है। पाठ में यह भी बताया गया है कि उनके अनुवाद का काम बहुत ही कठिन और समय-consuming था, लेकिन इस कार्य में उन्हें संतोष मिला है। उन्होंने इस ग्रंथ के प्रति विद्वानों की रुचि और प्रतिक्रिया का भी उल्लेख किया है। अंत में, उन्होंने पूर्ण महाभाष्य का अनुवाद करने का संकल्प लिया है, जो उनके ज्ञान और अनुभव के लिए महत्वपूर्ण होगा। इस प्रकार, पाठ में अनुवादक की मेहनत और उनके कार्य की प्रशंसा के साथ-साथ महाभाष्य की जटिलता और उसके अर्थ को समझने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।


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