मानसिक चिकित्सा | Mansik Chikitsa

- श्रेणी: Ayurveda | आयुर्वेद मनोवैज्ञानिक / Psychological रोग / disease शिक्षा / Education
- लेखक: लालजीराम शुक्ल - Laljiram Shukl
- पृष्ठ : 445
- साइज: 59 MB
-
-
Share Now:
दो शब्द :
इस पुस्तक का उद्देश्य पाठकों को मन के गहरे स्तरों से परिचित कराना है और यह समझाना है कि मानसिक दुःख भौतिक दुःखों से कहीं अधिक होते हैं। लेखक का मानना है कि जो लोग अपने मन को नियंत्रित कर सकते हैं, वे ही सुखी रह सकते हैं। मन को समझना और उसे वश में करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि सभी सुख-दुख मन की स्थिति का परिणाम होते हैं। पुस्तक में यह विचार रखा गया है कि मानसिक रोग अक्सर कल्पित होते हैं और कई शारीरिक रोगों की जड़ भी मन में होती है। मानसिक शुद्धि से इन रोगों का उपचार संभव है। लेखक ने मानसिक रोगों के उपचार के लिए आत्म-चिकित्सा पर जोर दिया है, लेकिन यह भी बताया है कि दूसरों की मदद करने से भी लाभ होता है। पुस्तक में विभिन्न चिकित्सा विधियों, जैसे मनोविश्लेषण और निर्देश चिकित्सा, के बारे में जानकारी दी गई है। लेखक ने अपने अनुभव और पूर्वी-पश्चिमी विद्वानों के अध्ययन के आधार पर इस पुस्तक को लिखा है। उन्होंने उल्लेख किया है कि मानसिक चिकित्सा में कई विशेषज्ञ कार्य कर रहे हैं और कुछ ने अद्वितीय सफलताएँ प्राप्त की हैं। इस पुस्तक में मानसिक रोगों के प्रकार, उनकी चिकित्सा के तरीके, और मानसिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक सावधानियों का विस्तृत वर्णन किया गया है। लेखक का मानना है कि यदि पाठक इस पुस्तक को ध्यान से पढ़ें, तो वे न केवल अपने मानसिक स्वास्थ्य को समझ पाएंगे, बल्कि मानसिक समस्याओं के समाधान के लिए उचित मार्गदर्शन भी प्राप्त करेंगे। अंततः, लेखक ने इस पुस्तक को लिखने का उद्देश्य यह बताया है कि वे पाठकों को मानसिक रोगों और उनकी चिकित्सा के बारे में जागरूक करना चाहते हैं, ताकि समाज में मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सके।
Please share your views, complaints, requests, or suggestions in the comment box below.