शिशुपाल वध महाकाव्य | Shishupaal vadh mahakavya

- श्रेणी: ग्रन्थ / granth ज्योतिष / Astrology धार्मिक / Religious महकाव्य / mahakavya संस्कृत /sanskrit
- लेखक: रामनाथ सुमन - Ramnath Suman
- पृष्ठ : 583
- साइज: 11 MB
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दो शब्द :
इस पाठ में शिशुपालवध महाकाव्य का महत्व और इसकी विशेषताओं पर प्रकाश डाला गया है। शिशुपालवध संस्कृत महाकाव्यों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है और इस पर विचार करने के लिए इसे हिन्दी में अनुवादित किया गया है। माघ कवि द्वारा रचित इस महाकाव्य का पहले भी ध्यान आकर्षित किया गया था, लेकिन कुछ विद्वानों ने इसे उतना सराहा नहीं था। इसके बाद, प्रसिद्ध मत्स्यमहापुराण और वायुपुराण के अनुवाद के लिए श्री झामप्रतापजी त्रिपाठी शास्त्री को नियुक्त किया गया, जिन्होंने इसे सरल और सुबोध भाषा में प्रस्तुत किया है। मध्यकालीन संस्कृत काव्य में शिशुपालवध और अन्य महत्वपूर्ण काव्यों की चर्चा की गई है, जिसमें माघ और कालिदास जैसे कवियों की तुलना की गई है। माघ की काव्य रचनाओं में अद्वितीयता और गहराई है, जो उन्हें अन्य कवियों से अलग बनाती है। शिशुपालवध की संरचना और काव्यशास्त्र में विभिन्न छंदों का प्रयोग किया गया है, जो इसे विशेष बनाता है। माघ की कविता में नई शब्दावली, संगीतात्मकता और भावों की नवीनता है, जिससे यह पाठकों के हृदय को छू जाती है। माघ की इस एकमात्र रचना ने उन्हें संस्कृत साहित्य में अमरता प्रदान की है। पाठ के अंत में, शिशुपालवध की कथा का संक्षेप में वर्णन किया गया है, जिसमें श्री कृष्ण और शिशुपाल के बीच के संबंध और संघर्ष को दर्शाया गया है। इस प्रकार, शिशुपालवध न केवल एक महाकाव्य है, बल्कि यह संस्कृत साहित्य की एक महत्त्वपूर्ण धरोहर भी है।
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