कलम का सिपाही | Kamal Ka Sipahi

- श्रेणी: साहित्य / Literature
- लेखक: प्रेमचंद - Premchand
- पृष्ठ : 664
- साइज: 45 MB
- वर्ष: 1962
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दो शब्द :
यह पाठ प्रेमचंद की जीवनी और उनके साहित्यिक योगदान पर आधारित है। लेखक ने यह स्पष्ट किया है कि जीवनी लेखन में भारतीय साहित्य में कमी है और उन्होंने इसका कारण बताते हुए कहा है कि हमारे देश में जीवनी लेखकों की कमी है। लेखक ने प्रेमचंद के जीवन को उनके सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भ में देखने का प्रयास किया है और इसके लिए उन्होंने विभिन्न स्रोतों का सहारा लिया है, जैसे कि संस्मरण, पत्र, और प्रेमचंद के छात्रों के बयान। लेखक ने अपने काम में प्रेमचंद के जीवन की वास्तविकता को दर्शाने का प्रयास किया है, जिसमें उनके संघर्ष, विचार, और उनकी लेखनी का महत्व शामिल है। उन्होंने बताया है कि प्रेमचंद का जीवन अति-सामान्य होते हुए भी विशेष था और उन्होंने इसे समझने में काफी कठिनाई का सामना किया। प्रेमचंद के व्यक्तित्व और उनके लेखन की प्रक्रिया का अवलोकन करते हुए, लेखक ने यह भी उल्लेख किया है कि प्रेमचंद की जीवनी लिखने का कार्य एक चुनौती थी। लेखक ने अपने काम में शामिल अनेक लोगों का आभार प्रकट किया है, जिन्होंने उनके काम में मदद की। इस प्रकार, यह पाठ प्रेमचंद की रचनात्मकता, उनकी जीवनी लेखन की चुनौतियों, और भारतीय साहित्य में जीवनी लेखन की स्थिति पर एक महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत करता है।
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