ज्योतिष-विज्ञान | Jyotish Vigyan

- श्रेणी: ज्योतिष / Astrology विज्ञान / Science
- लेखक: स्वामी श्री विशुध्दानंद जी - Swami Shri Vishudhdanand Ji
- पृष्ठ : 255
- साइज: 11 MB
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दो शब्द :
इस पाठ में ज्योतिष-विज्ञान का विवेचन किया गया है, जिसमें विभिन्न नक्षत्रों, राशियों और उनके स्वामी ग्रहों का वर्णन है। पाठ में चंद्रमा का संचार, नक्षत्रों के चरण, और विभिन्न राशियों के स्वामी ग्रहों के बारे में जानकारी दी गई है। पाठ में यह बताया गया है कि जब किसी व्यक्ति का जन्म होता है, तो उस समय जो नक्षत्र सक्रिय होता है, उसी के आधार पर जन्म का नाम रखा जाता है। इसके अलावा, जन्म के समय की तिथि, नक्षत्र और लग्न का भी महत्व बताया गया है। ज्योतिष में विवाह संस्कार के लिए उपयुक्त नक्षत्रों का उल्लेख किया गया है, जैसे रोहिणी, उत्तर, रेवती आदि, जो विवाह के लिए शुभ माने जाते हैं। विवाह के लिए मासों का नियम भी बताया गया है, जिसमें कुछ विशेष महीनों में विवाह को शुभ बताया गया है, जबकि अन्य महीनों को वर्जित माना गया है। इस प्रकार, पाठ में ज्योतिष विज्ञान के विभिन्न पहलुओं को समझाने की कोशिश की गई है, जिसमें नक्षत्रों, राशियों, और विवाह के समय के महत्व को प्रमुखता से दर्शाया गया है।
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