याज्ञवल्कय स्मृति | The Yajnavalkya Smriti

- श्रेणी: ग्रन्थ / granth धार्मिक / Religious संस्कृत /sanskrit हिंदी / Hindi हिंदू - Hinduism
- लेखक: याज्ञवल्क्य - Yajnavalkya
- पृष्ठ : 246
- साइज: 6 MB
- वर्ष: 1830
-
-
Share Now:
दो शब्द :
इस पाठ में धर्म और धर्मशास्त्र की परिभाषा, महत्व और याज्ञवल्क्य तथा उनके योगदान पर चर्चा की गई है। बेद को श्रुति और पघर्मशास्त्र को स्मृति कहा गया है। मनुस्मृति और याज्ञवल्क्य स्मृति का अर्थ और उद्देश्यों का उल्लेख किया गया है। धर्म का तात्पर्य उन कर्मों से है जो मनुष्य को स्वर्ग और मोक्ष की प्राप्ति में सहायक होते हैं, जबकि अधर्म उन कर्मों को कहा गया है जो तमोगुण, क्रोध और मोह को बढ़ाते हैं। धर्म को धारण करने के लिए आवश्यक माना गया है, क्योंकि इसके बिना मनुष्य सुख और शांति प्राप्त नहीं कर सकता। याज्ञवल्क्य का समय, उनके योगदान और उनके ग्रंथों का भी वर्णन किया गया है। याज्ञवल्क्य की विद्या और उनकी पत्नी मैत्रेयी तथा गार्गी के ज्ञान के प्रसंगों के माध्यम से नारी शिक्षा और विद्या की महत्ता को भी उजागर किया गया है। इस पाठ में याज्ञवल्क्य द्वारा स्थापित धार्मिक विचार और उनके अनुयायियों के ज्ञान का भी उल्लेख है, जो दर्शाता है कि प्राचीन भारतीय समाज में धर्म का कितना महत्वपूर्ण स्थान था। पाठ का अंत याज्ञवल्क्य की स्मृतियों और उनके ग्रंथों की व्याख्या से होता है, जिसमें यह बताया गया है कि कैसे ये ग्रंथ आज भी प्रासंगिक हैं।
Please share your views, complaints, requests, or suggestions in the comment box below.