ज्योतिषचंद्रिका | Jyotishchandrika

By: गंगा प्रसाद गुप्त - Ganga Prasad Gupt
ज्योतिषचंद्रिका | Jyotishchandrika by


दो शब्द :

इस पाठ में विभिन्न भूगोलिक और खगोलिक विचारों का वर्णन किया गया है। इसमें पृथ्वी, उसके आकार, परिधि, व्यास और पाताल के निवासियों के बारे में चर्चा की गई है। पाठ में यह स्पष्ट किया गया है कि पृथ्वी के विभिन्न हिस्सों में मनुष्य और अन्य प्राणियों का निवास है। पाताल के निवासियों के बारे में बताया गया है कि वे हमारे लिए 'ऊपर' और 'नीचे' के दृष्टिकोण से उलटे होते हैं। मनुष्य अपने अनुभव के अनुसार अपने स्थान को ऊपर और नीचे मानता है। इसके साथ ही, पाठ में पृथ्वी की परिधि और व्यास की गणना भी की गई है, जिसमें याजन का उपयोग किया गया है। यह बताया गया है कि पृथ्वी की परिधि लगभग 4867 याजन और व्यास 1481 याजन है। पाठ में यह भी उल्लेख किया गया है कि विभिन्न स्थानों की स्थिति और समय का निर्धारण कैसे किया जाता है, जैसे कि देशान्तर और अचाक्षांश का उपयोग करके। अंत में, पाठ में यह भी बताया गया है कि ग्रहण के समय की गणना कैसे की जाती है और यह किस प्रकार की खगोलीय घटनाओं से संबंधित है। इस प्रकार, यह पाठ भूगोल, खगोल विज्ञान और पाताल के निवासियों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करता है।


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