जल चिकित्सा अर्थात पानी का इलाज | Jal Chikitsa Arthat Pani Ka Elaj

- श्रेणी: Aushadhi | औषधि Ayurveda | आयुर्वेद मानसिक शक्ति/ Mansik Shakti योग / Yoga
- लेखक: युगलकिशोर - Yugalkishor
- पृष्ठ : 60
- साइज: 2 MB
- वर्ष: 1938
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दो शब्द :
इस पाठ में प्राकृतिक चिकित्सा, विशेष रूप से जल चिकित्सा पर जोर दिया गया है। लेखक का मानना है कि आजकल कई तरह के रोग फैल रहे हैं और उनके इलाज के लिए लोग विभिन्न दवाओं का सहारा ले रहे हैं। हालांकि, लेखक का कहना है कि अधिकांश रोगों का कारण मानव का प्रकृति के विपरीत जीवन जीना है और इसका समाधान स्वाभाविक जीवनशैली अपनाने में है। पुस्तक में जल के उपचारों के माध्यम से शारीरिक और मानसिक रोगों को ठीक करने की विधियाँ बताई गई हैं। लेखक ने प्राकृतिक स्नान की प्रक्रिया, उसके महत्व और उचित पथ्य के साथ स्नान करने के लाभों का वर्णन किया है। उनका तर्क है कि साधारण जल स्नान से सभी रोगों का इलाज संभव है और यह विधि सरल, सस्ती और प्रभावी है। लेखक ने यह भी बताया है कि प्राकृतिक चिकित्सा में कोई दवा या चीर-फाड़ की आवश्यकता नहीं होती। वह इस बात पर जोर देते हैं कि मनुष्य को प्राकृतिक चिकित्सा का सम्मान करना चाहिए और इसे अपनाना चाहिए ताकि वे बिना किसी दवा के स्वस्थ रह सकें। पाठ के अंत में लेखक ने यह आग्रह किया है कि समाज को स्वास्थ्य के लिए प्राकृतिक चिकित्सा को अपनाना चाहिए ताकि लोग बेहतर स्वास्थ्य प्राप्त कर सकें और अस्पतालों तथा औषधियों पर निर्भरता कम हो सके। उनका विश्वास है कि यदि लोग जल चिकित्सा और स्वाभाविक स्नान विधियों का अनुसरण करें, तो वे रोगों से मुक्त हो सकते हैं और एक स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।
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