मध्यकालीन भारत क्लास-७ | Madhyakalin Bharat Class-7

By: रोमिला थापर - ROMILA THAPAR


दो शब्द :

यह पाठ्यपुस्तक सातवीं कक्षा के छात्रों के लिए इतिहास के अध्ययन में सहायक है। इसका उद्देश्य छात्रों को भारत के मध्यकालीन इतिहास से परिचित कराना है, जो लगभग आठवीं शताब्दी से अठारहवीं शताब्दी के प्रारंभ तक फैला है। इस पाठ्यपुस्तक को प्रोफेसर रोमिला थापर ने लिखा है और इसमें इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं, सामाजिक जीवन, धर्म, कला, और भाषा के विकास का वर्णन किया गया है। पुस्तक के अनुसार, मध्यकालीन भारत के इतिहास को समझने के लिए यह महत्वपूर्ण है कि हम यह जानें कि प्राचीन काल और आधुनिक काल के बीच का समय कैसे बीता। मध्यकाल का आरंभ आठवीं शताब्दी से और अंत अठारहवीं शताब्दी में माना गया है। इस काल में भारत के सामाजिक जीवन में कई परिवर्तन हुए, जो राजनीति, अर्थव्यवस्था, और संस्कृति पर प्रभाव डालते हैं। इतिहास के अध्ययन के लिए विभिन्न साहित्यिक और पुरातात्त्विक साधनों का उपयोग किया गया है, जैसे कि ताम्रपत्र और शिलालेख, जो इस काल की घटनाओं के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं। पाठ्यपुस्तक में यह भी बताया गया है कि विदेशियों के भारत में आगमन के कारण बाहरी दुनिया से भारत का संबंध बढ़ा और इसने भारतीय संस्कृति को समृद्ध बनाया। इस पुस्तक का उद्देश्य छात्रों को एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इतिहास की पढ़ाई कराना और उन्हें विभिन्न सांस्कृतिक और सामाजिक पहलुओं से अवगत कराना है। पाठ्यपुस्तक में दिए गए अध्यायों में भारत और संसार, दक्षिणी और उत्तर भारत के राज्य, दिल्ली के सुल्तान, और मुगलों का आगमन, आदि विषयों पर चर्चा की गई है। इस प्रकार, यह पाठ्यपुस्तक छात्रों को मध्यकालीन भारत के इतिहास के विभिन्न पहलुओं को समझने और उनकी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर प्रदान करती है।


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