बिहारी- सतसई | Bihari -Satasai

- श्रेणी: चौपाया और छंद / chaupaya and chhnad दोहे /dohas हिंदी / Hindi
- लेखक: श्रीरामलोचनशरण - Shree ram lochansharan
- पृष्ठ : 322
- साइज: 14 MB
- वर्ष: 1903
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दो शब्द :
"बिहारी-सतसई" एक महत्वपूर्ण काव्य रचना है, जिसमें प्रेम और भक्ति के भावों का वर्णन किया गया है। इस काव्य में राधा और कृष्ण के प्रेम की गहराई और सुंदरता को दर्शाया गया है। कवि ने कृष्ण की मोहक मूर्ति और राधा की सुंदरता का अद्भुत चित्रण किया है। कविता में कृष्ण के रूप, उनके वस्त्र, आभूषण और उनके प्रेम की शक्ति का बखान किया गया है। राधा और कृष्ण के प्रेम को इतनी गहराई से प्रस्तुत किया गया है कि यह प्रेम केवल भक्ति का नहीं, बल्कि जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा प्रतीत होता है। कवि ने यह भी बताया है कि राधा और कृष्ण का प्रेम विभिन्न तीर्थों और स्थानों को भी पवित्र बना देता है। उनके प्रेम के क्षणों को दर्शाने के लिए कवि ने ब्रज की लीलाओं का उल्लेख किया है, जहां कृष्ण और राधा की क्रीड़ाएँ और संवाद सीधे हृदय को छू लेते हैं। इस रचना में कवि ने प्रेम, सौंदर्य, और भक्ति के अद्भुत संयोग को प्रस्तुत किया है। यह काव्य केवल साहित्यिक मूल्य नहीं रखता, बल्कि यह भक्ति और प्रेम के गहरे अनुभव को भी दर्शाता है। कृष्ण की छवि, राधा की सुंदरता, और उनके प्रेम की सृष्टि को इस काव्य में अद्भुत ढंग से प्रस्तुत किया गया है, जिससे पाठक को एक दिव्य अनुभव होता है।
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