राजनीती विज्ञान के सिद्धांत | principle of Political science

- श्रेणी: Crime,Law and Governance | अपराध ,कानून और शासन Cultural Studies | सभ्यता और संस्कृति Freedom and Politics | आज़ादी और राजनीति
- लेखक: पुखराज जैन - Pukhraj Jain
- पृष्ठ : 466
- साइज: 9 MB
- वर्ष: 1971
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दो शब्द :
इस पाठ का सारांश इस प्रकार है: पुस्तक "राजनीति विज्ञान के सिद्धान्त" का उद्देश्य विद्यार्थियों को राजनीति विज्ञान के मूल सिद्धांतों से परिचित कराना है। इसमें राजनीति विज्ञान के अध्ययन का केंद्र राज्य और सरकार को बताया गया है। राजनीतिक संस्थाओं में राज्य का महत्व सबसे अधिक है और इसे राजनीति का मूल तत्व माना जाता है। इसके अनुसार, राजनीति विज्ञान का अध्ययन केवल राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सरकार का भी अध्ययन किया जाता है, क्योंकि सरकार राज्य की शक्ति का प्रयोग करती है। विभिन्न विद्वानों ने राजनीति विज्ञान को परिभाषित किया है, जिसमें राज्य और सरकार के अध्ययन को प्राथमिकता दी गई है। हालांकि, यह भी स्वीकार किया गया है कि राजनीति विज्ञान में मानव तत्व का अध्ययन भी आवश्यक है, क्योंकि राज्य और सरकार का कार्य मानव जीवन को प्रभावित करता है। राजनीति विज्ञान को एक विज्ञान माना गया है, लेकिन इसे अनिर्धारित विज्ञान के रूप में भी देखा गया है। इसमें कुछ स्थायित्व और सामान्यताएँ हैं, लेकिन मानव व्यवहार की विविधता के कारण पूर्ण निश्चितता नहीं होती। विद्वानों ने राजनीति विज्ञान में प्रयोग और भविष्यवाणी की क्षमता को भी महत्वपूर्ण माना है, यद्यपि यह प्राकृतिक विज्ञान के स्तर पर नहीं पहुंचता। इस प्रकार, राजनीति विज्ञान का अध्ययन राज्य, सरकार और मानव व्यवहार के बीच के संबंधों को समझने के लिए आवश्यक है, और इसे एक विज्ञान के रूप में मान्यता प्राप्त है, जिसमें कई जटिलताएँ और अनिर्धारण हैं।
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