योग और शिक्षा | Yoga and Education

By: राजेश - Rajesh
योग और शिक्षा | Yoga and Education by


दो शब्द :

इस पाठ में योग और शिक्षा के संबंध में विचार किया गया है। लेखक ने आधुनिक शिक्षा प्रणाली की आलोचना की है, जो अंग्रेजों द्वारा स्थापित की गई थी और जिसका मुख्य उद्देश्य केवल कार्यालयों में काम करने के लिए कर्मचारियों का निर्माण करना था। इस शिक्षा प्रणाली ने भारतीय संस्कृति और सभ्यता का अपमान किया और भारतीयों को अपनी प्राचीन मान्यताओं से दूर कर दिया। लेखक का कहना है कि प्राचीन शिक्षा व्यवस्था मुसलमानों के आक्रमण से नष्ट हो गई थी और इस कारण अधिकांश लोगों को हमारे प्राचीन ग्रंथों का ज्ञान नहीं था। आज भी हम केवल प्राचीन पुस्तकों के नाम को याद करते हैं, लेकिन उनके वास्तविक ज्ञान को समझने का प्रयास नहीं करते। योग और शिक्षा के संबंध में लेखक ने बताया है कि सभी धर्म ईश्वर के निर्विकार स्वरूप को मानते हैं और योग भी इस सत्य को स्वीकार करता है। योग का उद्देश्य जीव का ब्रह्म से मिलाना है, लेकिन पहले मानव के मानव से जुड़ना आवश्यक है। लेखक ने यह भी बताया कि योग के सिद्धांतों का पालन करना कठिन है, लेकिन इसके निरंतर अभ्यास से एक व्यक्ति इसमें सफल हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में तकनीकी और व्यावसायिक ज्ञान का महत्व है, लेकिन यह आत्म विकास के लिए पर्याप्त नहीं है। अंत में, लेखक ने यह निष्कर्ष निकाला है कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति द्वारा योग के मूल सिद्धांतों का पालन करने से समाज में सुधार हो सकता है, और यह मानव धर्म का मूल है।


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