थे कुमारसम्भव (१९३५)एक ४३० | The Kumarasambhava (1935)ac 430

By: कालिदास - Kalidas


दो शब्द :

इस पाठ का सारांश निम्नलिखित है: पाठ का मुख्य विषय कुमारसंभव नामक महाकाव्य है, जो कालिदास द्वारा रचित है। इसमें शिव और पार्वती के प्रेम और विवाह की कथा का वर्णन किया गया है। काव्य की शुरुआत हिमालय पर्वत के वर्णन से होती है, जिसमें उसकी दिव्यता और महत्व को दर्शाया गया है। पाठ में शिव की शक्ति और पार्वती के प्रति उनके प्रेम का विशेष ध्यान दिया गया है। कविता में प्राकृतिक सौंदर्य, देवताओं और उनके संबंधों के बारे में भी गहराई से चर्चा की गई है। हिमालय को देवताओं का निवास स्थान मानते हुए उसकी पूजा की गई है। पार्वती की सुंदरता और उसके विवाह की इच्छा को भी प्रमुखता से चित्रित किया गया है। कविता का उद्देश्य प्रेम, सौंदर्य और प्रकृति के साथ-साथ आध्यात्मिकता को भी उजागर करना है। इस काव्य में विभिन्न दार्शनिक और सांस्कृतिक तत्वों का समावेश किया गया है, जो पाठक को एक गहन अनुभव प्रदान करता है। संक्षेप में, यह पाठ कुमारसंभव के काव्यात्मक तत्वों, प्रेम की गहराई और हिमालय की दिव्यता को दर्शाता है।


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