कविता कौमुदी | Kawita Kumudi

By: रामनरेश त्रिपाठी - Ramnaresh Tripathi


दो शब्द :

इस पाठ में काव्य और कविता के महत्व को समझाया गया है। काव्य साहित्य को अद्भुत आनंद देने वाला माना गया है, जो अन्य साहित्यिक रूपों से भिन्न है। काव्य के छोटे-से पद में भी गहरा प्रभाव होता है, जिससे पाठक या श्रोता में विभिन्न भावनाएं जागृत होती हैं। काव्य का उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि हृदय के भावों को भी व्यक्त करना है। कविता की आत्मा रस होती है, जिसका अनुभव पाठक या श्रोता तब करता है जब उसे काव्य में विभाव, अनुभाव और सचारी भाव के साथ स्थायी भाव का अनुभव होता है। रस का अनुभव जब पाठक के हृदय में उत्पन्न होता है, तब वह अलौकिक आनंद का अनुभव करता है। स्थायी भावों के अंतर्गत रति, शोक, उत्साह आदि आते हैं, जिनसे विभिन्न रसों की उत्पत्ति होती है। काव्य में शब्द और अर्थ का समन्वय होना आवश्यक है। काव्य की भाषा हमेशा अर्थ का अनुसरण करती है और उसमें गुण होना चाहिए। गुणों में माधुर्य, श्रोज और प्रसाद शामिल हैं। काव्य में दोषों से बचना भी आवश्यक है, जैसे कि अश्लीलता, अप्रसिद्धता आदि। कवि को सृष्टि के सौंदर्य का मर्मज्ञ माना गया है, जो हृदय से सृष्टि का निरीक्षण करता है और अपनी उन्मत्तता के माध्यम से काव्य की रचना करता है। कवि और साधारण व्यक्ति में यही अंतर होता है कि कवि हृदय की गहराइयों को समझकर उसे व्यक्त कर सकता है। कुल मिलाकर, यह पाठ काव्य की महत्ता, उसके तत्वों और कवि की भूमिका पर प्रकाश डालता है, यह दर्शाते हुए कि काव्य केवल शब्दों का खेल नहीं, बल्कि भावनाओं और अनुभवों का गहन संसार है।


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