श्री हनुमान चालीसा | shree Hanuman Chalisa

By: स्वामी रामभद्राचार्य - Swami Rambhadracharya


दो शब्द :

इस पाठ में गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित "श्रीहनुमान-चालीसा" का महावीरी व्याख्या के साथ प्रस्तुत किया गया है। यह एक महत्वपूर्ण धार्मिक ग्रंथ है, जिसमें हनुमान जी के गुणों, शक्तियों और उनकी आराधना का वर्णन किया गया है। व्याख्या का उद्देश्य पाठकों को इस स्तोत्र के गूढ़ अर्थ और इसके लाभों को समझाना है। व्याख्याकार जगहुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य ने इस चालीसा की महत्ता को दर्शाया है और इसे भक्तों के लिए विशेष रूप से समर्पित किया है। इस ग्रंथ में हनुमान जी की शक्तियों का वर्णन करते हुए उनके द्वारा किए गए कार्यों की चर्चा की गई है, जैसे कि सीता माता की खोज और रावण के सामर्थ्य का निराकरण। "श्रीहनुमान-चालीसा" में 43 पद हैं, जिनमें दो दोहे और 40 चौपाइयाँ शामिल हैं। यह पाठ भक्तों को संकटों से मुक्ति और मानसिक शांति प्रदान करने का आश्वासन देता है। पाठ के अंत में यह भी उल्लेख किया गया है कि हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करने से भक्तों को विभिन्न प्रकार की सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। इस व्याख्या में तुलसीदास की काव्यशैली और भाषा की सरलता को भी सराहा गया है, जिससे यह ग्रंथ सभी वर्गों के लोगों के लिए सुलभ और समझने में आसान हो गया है। यह पाठ भारतीय संस्कृति और धार्मिक आस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसके पाठ का महत्व भक्तों के जीवन में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।


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