स्वामी विवेकानन्द से वार्तालाप | Swami Vivekanand Se Vratalap

- श्रेणी: Speech and Updesh | भाषण और उपदेश जातिप्रथा / Caste System दार्शनिक, तत्त्वज्ञान और नीति | Philosophy भारत / India संस्कृत /sanskrit सामाजिक कौशल/social skills हिंदू - Hinduism
- लेखक: स्वामी विवेकानंद - Swami Vivekanand
- पृष्ठ : 160
- साइज: 3 MB
- वर्ष: 1956
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दो शब्द :
इस पाठ में स्वामी विवेकानंद के विचारों और उनके द्वारा किए गए संवादों का संकलन प्रस्तुत किया गया है। यह वार्तालाप विभिन्न विषयों पर केन्द्रित है, जिनमें भारतीय संस्कृति, वेदान्त, और समाज की समस्याएँ शामिल हैं। स्वामी विवेकानंद ने भारतीय दर्शन और संस्कृति के महत्व को उजागर किया और इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा और आत्मज्ञान के माध्यम से समाज में परिवर्तन लाया जा सकता है। स्वामी विवेकानंद ने बताया कि उन्होंने संन्यास लेने का निर्णय अपने गुरु श्रीरामकृष्ण परमहंस से प्रेरित होकर लिया। उन्होंने अपने अनुभवों के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी विशेष सम्प्रदाय की स्थापना करना नहीं है, बल्कि वे सभी प्राणियों के हृदय में विद्यमान आत्मा की सच्चाई को समझाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनका कार्य पाश्चात्य देशों में भारतीय संस्कृति और वेदान्त का प्रचार करना है, जहाँ उनके विचारों को सकारात्मक रूप से स्वीकार किया जा रहा है। स्वामी विवेकानंद ने यह स्पष्ट किया कि वे किसी गुप्त समाज या समिति का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि वे सत्य और आत्मज्ञान का प्रचार करते हैं। इस प्रकार, स्वामी विवेकानंद के विचार न केवल भारतीय संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाते हैं, बल्कि आत्मज्ञान और व्यक्तिगत विकास के महत्व को भी रेखांकित करते हैं। उनके संवादों में एक गहरी आत्मिक शिक्षा है, जो मानवता के लिए प्रेरणादायक है।
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