सनातन धर्म का वैज्ञानिक रहस्य | Sanatan Dharm Ka Vaigyanik Rahashya

- श्रेणी: जीवनी / Biography ज्ञान विधा / gyan vidhya ज्योतिष / Astrology धार्मिक / Religious भारत / India विज्ञान / Science संस्कृत /sanskrit साहित्य / Literature हिंदू - Hinduism
- लेखक: बाबूलाल गुप्त - Babulal Gupta
- पृष्ठ : 277
- साइज: 28 MB
- वर्ष: 1966
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दो शब्द :
इस पाठ में लेखक बाबूलाल गुप्त "श्याम" ने धर्म और विज्ञान के संबंध को समझाने का प्रयास किया है। उन्होंने यह दर्शाया है कि धर्म केवल आस्था से जुड़ा नहीं है, बल्कि इसमें गहरा वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी शामिल है। पाठ में विभिन्न धार्मिक आचार-व्यवहार और संस्कारों को वैज्ञानिक तरीके से प्रस्तुत किया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि धर्म का पालन जीवन में सुख और शांति लाने के लिए आवश्यक है। लेखक ने बताया है कि धर्म का मूल तत्व दया और सत्य है, और इसे समझने के लिए विद्वानों और संतों की शिक्षाओं का अनुसरण करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि विज्ञान के इस युग में धर्म को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखना जरूरी है, ताकि लोग इसे केवल परंपरा के रूप में नहीं, बल्कि जीवन के लिए आवश्यक तत्व के रूप में स्वीकार करें। पुस्तक में विभिन्न धार्मिक विधियों, संस्कारों और उनके वैज्ञानिक पहलुओं का उल्लेख किया गया है, जैसे भोजन की विधि, पूजा विधि, और अन्य धार्मिक क्रियाएँ। लेखक का मानना है कि ये सभी क्रियाएँ व्यक्ति के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं। अंत में, लेखक ने यह सुझाव दिया है कि समाज को धर्म को समझने और अपनाने के लिए एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना होगा, ताकि लोग इसे सही मायने में अपने जीवन में शामिल कर सकें। धर्म और विज्ञान का यह समन्वय समाज के विकास और कल्याण के लिए आवश्यक है।
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