महाभारत (चतुर्थ खण्ड) | Mahabharat Chaturth Khand

- श्रेणी: हिंदू - Hinduism
- लेखक: पं. श्री रामनारायणदत्त जी शास्त्री - Pt. Shri Ramnarayandatt Ji Shastri
- पृष्ठ : 1468
- साइज: 170 MB
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दो शब्द :
यह पाठ महाभारत के चौथे खंड का सारांश है, जिसमें द्रोण, कर्ण, शल्य, सोत्तिक और श्रीपव का वर्णन किया गया है। इसमें द्रोणाचार्य के अभिषेक, युद्ध के दौरान कौरवों और पांडवों के बीच की घटनाओं का विवरण है। पाठ में भीष्मजी के धराशायी होने के बाद कौरवों का शोक, कर्ण की रणयात्रा, भीष्मजी का कर्ण को प्रोत्साहित करना, और द्रोणाचार्य का सेनापति के रूप में अभिषेक शामिल है। पाठ में द्रोणाचार्य के युद्ध कौशल, उनके पराक्रम, और कई महत्वपूर्ण योद्धाओं के साथ उनके युद्ध का वर्णन है। इसमें विभिन्न अध्यायों के माध्यम से युद्ध के दौरान की घटनाओं का क्रमवार विवरण दिया गया है, जैसे कर्ण का दुर्योधन के समक्ष सेनापति पद के लिए द्रोणाचार्य का नाम प्रस्तावित करना, द्रोणाचार्य के सेनापति बनने के बाद की घटनाएँ, और अंत में द्रोणाचार्य की मृत्यु का समाचार सुनकर धृतराष्ट्र का शोक। इसमें युद्ध के दौरान अर्जुन, भीम, कर्ण और अन्य योद्धाओं के बीच के संघर्षों का भी वर्णन है, जिसमें द्रोणाचार्य की रणनीतियों और उनकी वीरता का उल्लेख किया गया है। पाठ का अंत द्रोणाचार्य की मृत्यु और उसके बाद के घटनाक्रमों के साथ होता है, जिसमें कौरवों और पांडवों के बीच के संघर्ष को और भी गहरा किया गया है।
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