थे सिद्धांत-सिरोमनि | The Siddhant siromani

By: गिरिराज प्रसाद द्विवेदी - Giriraj Prasad Dvivedi


दो शब्द :

इस पाठ में भारतीय ज्योतिष के प्राचीन इतिहास और विकास पर चर्चा की गई है। यह बताया गया है कि भारतीय ज्योतिष का प्रमाण वेदों, विशेष रूप से वेदांग ज्योतिष, में मिलता है। प्राचीन ऋषियों ने ज्योतिष को विभिन्न ग्रंथों के माध्यम से विकसित किया है, और यह भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। पाठ में यह भी उल्लेख किया गया है कि प्राचीन भारतीय सभ्यता में ज्योतिष का स्थान अत्यधिक महत्वपूर्ण था, और इसे विभिन्न धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों में उपयोग किया गया। वेदों और अन्य प्राचीन ग्रंथों में ज्योतिष के सिद्धांतों का विस्तृत वर्णन मिलता है, जो यह दर्शाता है कि यह विषय कितना गहरा और व्यापक है। इसके अलावा, पाठ में यह भी संकेत दिया गया है कि भारतीय ज्योतिष को समझने के लिए कई प्राचीन ग्रंथों और टीकाओं का अध्ययन आवश्यक है। पाठ में विभिन्न विद्वानों के योगदान का भी उल्लेख किया गया है, जिन्होंने ज्योतिष के सिद्धांतों को विकसित और स्पष्ट किया। कुल मिलाकर, यह पाठ भारतीय ज्योतिष की प्राचीनता, उसके विकास और उसकी महत्वता पर प्रकाश डालता है।


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