नारी रोगजनक | Nari Rogank

- श्रेणी: Ayurveda | आयुर्वेद साहित्य / Literature
- लेखक: वैद्य देवीशरण गर्ग - Vaidh Devisharan Garag
- पृष्ठ : 644
- साइज: 53 MB
- वर्ष: 1956
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दो शब्द :
इस पाठ में 'धन्वन्तरि आयुर्वेद' नामक मासिक पत्रिका के विशेषांक के महत्व और उपयोगिता पर प्रकाश डाला गया है। पाठक से अपील की गई है कि वे इस पत्रिका को अपनाएं और इसे दूसरों को भी बताएं। पत्रिका में आयुर्वेद से जुड़ी अनेक उपयोगी जानकारियाँ, चिकित्सा विधियाँ, और औषधियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है। लेखक ने पाठकों को प्रेरित किया है कि वे दो नए पाठक जोड़ें, जिससे पत्रिका की पहुंच और प्रभाव बढ़ सके। इसके अलावा, पाठ में एक विशेष बिजली की मशीन के लाभों का उल्लेख किया गया है, जो विभिन्न रोगों का उपचार करने में सहायक सिद्ध हुई है। पाठक ने मशीन के उपयोग से मिले सकारात्मक अनुभवों को साझा किया है, जिसमें कई रोगियों को लाभ हुआ है। अंत में, पाठ में विभिन्न औषधियों का विवरण दिया गया है, जो विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के उपचार के लिए प्रभावी हैं। सभी औषधियों के विशेष गुण और उपयोग के तरीके भी बताए गए हैं, जिससे पाठकों को आयुर्वेदिक उपचार की महत्ता का अनुभव हो सके। पाठ में सामूहिक रूप से आयुर्वेद के प्रति प्रेम और समर्पण की भावना व्यक्त की गई है, जिससे पाठकों को प्रेरित किया जा सके।
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