योग-शास्त्र | Yog-shastra in hindi

By: आचार्य श्री हेमचन्द्र - Aacharya Shri Hemchandra


दो शब्द :

इस पाठ में योग-शास्त्र के महत्व और उसकी विशेषताओं पर चर्चा की गई है। यह ग्रंथ आचार्य हेमचन्द्र द्वारा लिखा गया है और इसमें योग साधना की विभिन्न परिभाषाएँ और उसके उद्देश्यों का वर्णन किया गया है। योग का अर्थ 'जोड़ना' और 'समाधि' है, जिसमें व्यक्ति की आंतरिक शक्तियों को जागरूक करने और जीवन में स्थिरता लाने की प्रक्रिया को समझाया गया है। पाठ में यह बताया गया है कि योग साधना का उद्देश्य आत्मा की विशुद्धि और मानसिक स्थिरता है, जिससे व्यक्ति अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सके। योग का महत्व इस प्रकार बताया गया है कि यह व्यक्ति को उसकी अनंत शक्तियों के प्रति जागरूक करता है और उसे जीवन में एकाग्रता एवं संकल्प शक्ति प्रदान करता है। ग्रंथ में योग की विभिन्न विधियों, जैसे प्राणायाम, ध्यान, और मन की वृत्तियों का निरोध करने के तरीकों का विस्तृत वर्णन किया गया है। इसके अलावा, योग के माध्यम से आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति में सहायता करने वाले तत्वों पर भी प्रकाश डाला गया है। यह ग्रंथ भारतीय संस्कृति और योग परंपरा के प्रति गहरी समझ विकसित करने में सहायक है। इस प्रकार, योग-शास्त्र एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जो व्यक्ति के आत्मिक विकास और साधना के मार्ग में मार्गदर्शक भूमिका निभाता है।


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