कर्नल रणजीत सिंह जी | Karnal Ranjeet Singh Ji

By: कर्नल रंजीत सिंह - karnal ranjeetsingh


दो शब्द :

इस पाठ में चार जासूसी उपन्यासों का संक्षिप्त परिचय दिया गया है। पहले उपन्यास "भयंकर मत" का विषय एक रोमांचकारी हत्या के रहस्य को सुलझाने की कहानी है, जिसमें जूम्वो नामक एक भयंकर मूरत का बदला लेने की प्रक्रिया को दर्शाया गया है। दूसरे उपन्यास "रेखनी छोंटे" में एक घिनौने इंसान के अपराधों का सिलसिला है, जिसे मेजर वलवंत ने जोखिम उठाकर सुलझाया। तीसरे उपन्यास "टेढ़ी उंगलियां" में समाज में आदर पाने वाले खतरनाक अपराधियों का पर्दाफाश किया गया है, और चौथे उपन्यास "खाली कंगन" में एक अनोखी साजिश की कहानी है, जिसमें खोज और रहस्य का रोमांच है। इस पाठ का एक महत्वपूर्ण भाग मेजर वलवंत और सोनिया का दिल्ली पहुंचना है, जहां वे लाला केदारनाथ वर्मा के घर जाते हैं। वहां उनके बीच बातचीत होती है, जिसमें दिल्ली में हो रही हत्याओं और अपराधों का जिक्र होता है। लाला वर्मा एक जज हैं और उनकी बातचीत से पता चलता है कि शहर में भय और आतंक का माहौल है। एक विशेष मामले में, एक इंजीनियर और उसकी बेटी का अपहरण हुआ है, जो पूरे शहर में चर्चा का विषय बन गया है। मेजर वलवंत इन घटनाओं को समझते हैं और इस भयावहता के पीछे की सच्चाई को जानने के लिए प्रयासरत हैं। इस कहानी में जासूसी, हत्या, अपराध, और सामाजिक समस्याओं का गहन चित्रण किया गया है, जो पाठक को रोमांचित करता है और उन्हें सोचने पर मजबूर करता है।


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