क़ुरान | Quraan

By: अज्ञात - Unknown
क़ुरान  | Quraan by


दो शब्द :

इस पाठ में अल्लाह की ओर से मुसलमानों को दी गई हिदायतों और उनके लिए निर्धारित किब्ले (प्रार्थना की दिशा) के बारे में चर्चा की गई है। पाठ में यह बताया गया है कि मुसलमानों को पहले जिस किब्ले की ओर प्रार्थना करने का आदेश था, वह बदलकर मस्जिदे हराम (काबा) की ओर कर दी गई है। इस बदलाव का उद्देश्य यह है कि यह देखा जा सके कि कौन रसूल की पैरवी करता है और कौन पीछे हट जाता है। पाठ में यह भी कहा गया है कि अल्लाह ने मुसलमानों को बेहतरीन उम्मत बनाया है ताकि वे लोगों के लिए गवाह बन सकें। हर व्यक्ति को अपने चेहरे को मस्जिदे हराम की ओर फेरे बिना प्रार्थना नहीं करनी चाहिए, ताकि अन्य लोग उन पर एतराज न कर सकें। इस बदलाव की वजह से अगर कोई शक करता है, तो उन्हें बताया गया है कि हक उनके रब की ओर से है। पाठ में यह भी उल्लेख किया गया है कि अल्लाह की निशानियों को छिपाने वाले लोग सजा के हकदार हैं, जबकि जो लोग तौबा कर लेते हैं, अल्लाह उन्हें माफ कर देता है। अल्लाह की राह में मारे गए लोगों को मुर्दा नहीं कहा जाना चाहिए, क्योंकि वे जीवित हैं, लेकिन उनकी ज़िंदगी का एहसास नहीं होता। इसके अलावा, पाठ में मुसलमानों को सब्र और नमाज के माध्यम से मदद मांगने की सलाह दी गई है। अल्लाह ने उन्हें यह समझाया है कि जो लोग अल्लाह के आदेशों का पालन करते हैं, उनके लिए बहुत बड़ी नेमतें हैं। अंत में, पाठ में अल्लाह की एकता और उसके अद्भुत कार्यों का वर्णन किया गया है, जैसे कि सृष्टि और प्राकृतिक घटनाएं, जो अल्लाह के कुदरत के संकेत हैं।


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