सीध वनौषधि चिकित्सा | Sidh Vanoshdhi Chikitsa

- श्रेणी: Ayurveda | आयुर्वेद
- लेखक: रामगोपाल पटेल - Ramgopal Pate
- पृष्ठ : 118
- साइज: 2 MB
- वर्ष: 1951
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दो शब्द :
इस पाठ में लेखक ने अपने जीवन का अनुभव साझा किया है, जिसमें उन्होंने देहात में पशुपालन और उपचार की पारंपरिक विधियों पर ध्यान केंद्रित किया है। उन्होंने बताया है कि कैसे जब उनके घर का कोई पशु बीमार होता था, तो वे स्थानीय किसानों से दवा के लिए सलाह लेते थे और यह समझते थे कि आसपास की जड़ी-बूटियाँ और प्राकृतिक संसाधन कितने महत्वपूर्ण हैं। लेखक ने यह भी उल्लेख किया है कि भारतीय पशु चिकित्सा एक स्वतंत्र विज्ञान है, जो आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों से कहीं अधिक समृद्ध और सक्षम है, लेकिन इसे समय के साथ भुला दिया गया है। पाठ में लेखक ने यह चिंता व्यक्त की है कि लोग अपने पारंपरिक ज्ञान को अगली पीढ़ियों को नहीं सौंपते, जिससे यह ज्ञान धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है। उन्होंने पशुपालन में आम बीमारियों और उनके उपचार के अनुभवों को साझा किया है, जो उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में सीखे हैं। लेखक ने पश्चिमी चिकित्सा पद्धतियों की आलोचना की है, खासकर टीकाकरण के तरीकों को, जिन्हें उन्होंने हिंसात्मक और अस्थायी बताया है। उन्होंने यह भी कहा कि प्राकृतिक उपचारों का उपयोग करना और जड़ी-बूटियों से उपचार करना अधिक प्रभावी और सुरक्षित है। लेखक के अनुसार, पशुओं के लिए उपचार के पारंपरिक तरीके न केवल सस्ते हैं, बल्कि किसानों के लिए अधिक समझदारी भरे भी हैं। अंत में, लेखक ने अपने अनुभव को साझा करने के उद्देश्य से यह पुस्तक लिखी है, ताकि किसानों और पशुपालकों को लाभ हो सके। उन्होंने यह संकेत दिया है कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक उपचार विधियों को अपनाया जाए, तो यह पशु चिकित्सा में काफी प्रभावी हो सकता है।
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