मनोविज्ञान और शिक्षा | Manovigyan And Shiksha (Education And Psychology)

- श्रेणी: मनोवैज्ञानिक / Psychological शिक्षा / Education
- लेखक: सरयू प्रसाद चौबे - Saryu Prasad Choubey
- पृष्ठ : 666
- साइज: 34 MB
- वर्ष: 1953
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दो शब्द :
इस पाठ में मनोविज्ञान के अध्ययन की महत्ता और इसके विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई है। लेखक ने मनोविज्ञान को समझने के लिए इसके विकास, विषय-विस्तार और पद्धतियों का वर्णन किया है। मनोविज्ञान का उपयोग शिक्षा के क्षेत्र में अत्यधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह शिक्षक और अभिभावकों को बच्चों के स्वभाव और व्यवहार को समझने में मदद करता है। लेखक ने यह स्पष्ट किया है कि मनोविज्ञान के अध्ययन से हम बच्चों की संभावनाओं को समझ सकते हैं और उनके विकास में सहायक हो सकते हैं। यह अध्ययन केवल बच्चों के लिए ही नहीं, बल्कि सभी व्यक्तियों के लिए आवश्यक है, क्योंकि इससे हमें अपने व्यवहार और मानसिक स्थिति के बारे में भी जानकारी मिलती है। पाठ में यह भी बताया गया है कि मनोविज्ञान का अध्ययन केवल एक शास्त्रीय दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि व्यावहारिक दृष्टिकोण से भी किया जाना चाहिए। मनोविज्ञान का क्षेत्र बहुत व्यापक है और इसके अध्ययन से हमें शिक्षा, चिकित्सा, और सामाजिक विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में सहायता मिलती है। अंत में, लेखक ने पाठकों से आग्रह किया है कि वे इस पुस्तक के माध्यम से मनोविज्ञान के अध्ययन में रुचि लें और इसके प्रति अपनी समझ बढ़ाएं। पुस्तक का उद्देश्य हिंदी भाषी क्षेत्र में मनोविज्ञान को अधिक सुलभ और उपयोगी बनाना है।
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