अर्थसास्त्र ऑफ़ कौटिल्या एंड थे चाणक्य सूत्र | Arthasastra Of Kautilya And The Chanakya Sutra

- श्रेणी: Crime,Law and Governance | अपराध ,कानून और शासन Self-Help and Motivational | स्व सहायता पुस्तक और प्रेरक अर्थशास्त्र / Economics इतिहास / History दार्शनिक, तत्त्वज्ञान और नीति | Philosophy भारत / India विज्ञान / Science
- लेखक: कौटिल्य, चाणक्य - Kautilya, Chankaya
- पृष्ठ : 906
- साइज: 30 MB
- वर्ष: 1984
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दो शब्द :
इस पाठ में प्राचीन भारतीय समाज की शासन-व्यवस्था और समितियों का वर्णन किया गया है। प्राचीन भारत में विभिन्न प्रकार की सभाएं और समितियां थीं, जैसे कि प्रौढ़ों की राजसभा, जनता की सभा, और व्यापारियों का संघ। ये समितियां कानून बनाने और जनता के हित में निर्णय लेने के लिए जिम्मेदार थीं। वैदिक काल के दौरान, समितियों का महत्व बढ़ा और इन्हें राजा के चुनाव में भी शामिल किया गया। ऋग्वेद और अथर्ववेद में इन समितियों की भूमिका और उनके कार्यों का वर्णन मिलता है। समितियां न केवल राजनीतिक निर्णय लेती थीं, बल्कि शिक्षा और ज्ञान पर भी चर्चा करती थीं। समितियों में उपस्थित सदस्य समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधि होते थे, और इनका गठन ग्रामों, व्यापारियों और अन्य समुदायों के आधार पर किया जाता था। समय के साथ, समितियों की जगह परिषदों ने ले ली। पाठ में यह भी बताया गया है कि आदिम समाज में संघों की संरचना और उनके कार्य क्या थे। मनुष्य ने अपनी शुरुआती सभ्यता में समूहों के माध्यम से जीवन यापन किया और धीरे-धीरे सामाजिक जीवन की ओर अग्रसर हुआ। इसके बाद, विभिन्न युगों में मानव ने अपने आर्थिंक जीवन के लिए उत्पादन, वितरण और विनिमय के साधनों का विकास किया। पाठ में आग की उत्पत्ति का उल्लेख भी है, जो मानव जीवन में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन लाने वाला तत्व था। आग के उपयोग ने न केवल भोजन के पकाने में मदद की, बल्कि सुरक्षा के लिए भी इसका उपयोग किया गया। इस प्रकार, पाठ में प्राचीन भारतीय समाज की सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक संरचना का विस्तृत वर्णन किया गया है, जिसमें समितियों के कार्य, उनका विकास और मानव सभ्यता की शुरुआत से लेकर विभिन्न युगों में उनके प्रभाव का उल्लेख है।
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