श्री मध् भाग्वादिता (सचित्र साधक संजीवनी ) | shreemad Bhagwat Geeta( Sachitr Sadhak Sanijiwani tika)

By: स्वामी रामसुखदास - Swami Ramsukhdas
श्री मध् भाग्वादिता (सचित्र साधक संजीवनी ) | shreemad Bhagwat Geeta( Sachitr Sadhak Sanijiwani tika) by


दो शब्द :

यह पाठ भगवान श्रीकृष्ण की उपदेशों का संग्रह, श्रीमद्धभागवत गीता, के महत्व और उसकी व्याख्या पर केंद्रित है। लेखक स्वामी रामसुखदास जी ने इस ग्रंथ को मानवता के कल्याण के लिए एक दिव्य और अद्वितीय वाणी बताया है। गीता में भगवान ने अर्जुन को सही मार्ग दिखाने के लिए गहरी आध्यात्मिक बातें कही हैं, जो आज भी प्रासंगिक हैं। स्वामी जी ने गीता की टीका 'साधक-संजीवनी' के माध्यम से पाठकों के लिए गहराई से शोधित और अमूल्य ज्ञान प्रस्तुत किया है, जिससे साधक अपने जीवन में आध्यात्मिक उन्नति कर सके। उन्होंने यह भी उल्लेख किया है कि गीता की यह टीका विभिन्न धर्मों के अनुयायियों के लिए उपयोगी है और सभी को अपने-अपने मतानुसार उद्धार के उपाय प्रस्तुत करती है। पाठ में यह भी कहा गया है कि गीता की टीका का अध्ययन करना आवश्यक है, ताकि साधक इसे अपने जीवन में उतार सके। इसके साथ ही, स्वामी जी ने इस टीका के चार संस्करणों का उल्लेख किया है, जिसमें आवश्यक संशोधनों के साथ पाठकों के लाभ के लिए इसे और अधिक परिष्कृत किया गया है। इस प्रकार, पाठ एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक ग्रंथ की महत्ता, उसके अध्ययन की आवश्यकता और साधकों को दी जाने वाली शिक्षाओं का संक्षेप में वर्णन करता है।


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