ब्रह्मचर्य - विज्ञानं | Brahmacharya – Vigyan

- श्रेणी: Ayurveda | आयुर्वेद ज्ञान विधा / gyan vidhya धार्मिक / Religious ब्रह्मचर्य/ Brahmcharya विज्ञान / Science
- लेखक: जगन्नारायण देव शर्मा - Jagannarayan Dev Sharma
- पृष्ठ : 376
- साइज: 14 MB
- वर्ष: 1927
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दो शब्द :
इस पाठ में "ब्रह्मचर्य-विज्ञान" नामक पुस्तक का सार प्रस्तुत किया गया है। लेखक ने ब्रह्मचर्य के महत्व और उसके लाभों पर प्रकाश डाला है। उन्होंने यह स्पष्ट किया है कि ब्रह्मचर्य का पालन करने से व्यक्ति को न केवल व्यक्तिगत लाभ होता है, बल्कि समाज को भी इससे लाभ मिलता है। ब्रह्मचर्य का अभाव न केवल व्यक्तिगत जीवन में बल्कि सामाजिक जीवन में भी हानि का कारण बनता है। लेखक ने ब्रह्मचर्य को एक आवश्यक और महत्वपूर्ण विषय बताया है, जिसके बिना मानव जीवन में संतुलन और विकास संभव नहीं है। उन्होंने उल्लेख किया है कि ब्रह्मचर्य के पालन से व्यक्ति की बुद्धि और कार्यक्षमता में वृद्धि होती है, जिससे समाज में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं। पुस्तक में ब्रह्मचर्य के प्राचीन आदर्शों और वर्तमान समय की समस्याओं का विश्लेषण किया गया है। लेखक ने इस विषय पर प्राचीन ग्रंथों से उद्धरण भी दिए हैं, जो इस विषय की गहराई को दर्शाते हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि ब्रह्मचर्य की शिक्षा और इसके महत्व को समझना हमारे समाज के लिए अत्यंत आवश्यक है, ताकि हम अपने चरित्र का निर्माण कर सकें और समाज की समस्याओं का समाधान कर सकें। लेखक ने पाठकों से अपील की है कि वे इस विषय को गंभीरता से लें और अपने जीवन में ब्रह्मचर्य का पालन करें, जिससे न केवल उनका व्यक्तिगत विकास होगा, बल्कि समाज का भी उत्थान होगा। अंत में, लेखक ने पुस्तक में अपने विचारों के दोषों को स्वीकारते हुए, पाठकों से सुझाव मांगे हैं ताकि वे भविष्य में सुधार कर सकें।
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