अष्टांगहृदयँ | Ashtangahradayam

- श्रेणी: Aushadhi | औषधि Ayurveda | आयुर्वेद
- लेखक: ऋषि वाग्भट्ट - RISHI VAGBHATT
- पृष्ठ : 873
- साइज: 10 MB
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दो शब्द :
इस पाठ में आयुर्वेद का महत्व और उसकी चिकित्सा प्रणाली की संक्षिप्त जानकारी दी गई है। आयुर्वेद को चार मुख्य लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए अनुशंसित किया गया है: धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष। शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए आयुर्वेद के सिद्धांतों का उपयोग किया जाता है। पाठ में आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथों का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि कैसे चरक और वाग्भट जैसे विद्वानों ने आयुर्वेद की चिकित्सा पद्धतियों को विस्तृत किया। वाग्भट ने "अष्टाङ्ग हृदय" नामक ग्रंथ की रचना की, जिसमें आयुर्वेद की कई महत्वपूर्ण अवधारणाओं को समाहित किया गया है। आयुर्वेद को वेदों का उपांग माना गया है और इसकी प्राचीनता का प्रमाण विभिन्न साहित्यिक संदर्भों में मिलता है। पाठ में यह भी बताया गया है कि आयुर्वेद का ज्ञान आज भी प्रासंगिक है और इसे आधुनिक चिकित्सा के साथ संयोजित किया जा सकता है। इस प्रकार, आयुर्वेद एक समग्र चिकित्सा प्रणाली है, जो न केवल शारीरिक स्वास्थ्य, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक कल्याण पर भी ध्यान केंद्रित करती है।
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