श्री हनुमद वडवानल स्तोत्रम | Shree Hanumad Vadvanal stotram

- श्रेणी: जीवनी / Biography भक्ति/ bhakti भजन और कथाएं /Bhajan & Kathayein
- लेखक: श्री सुमित गिरधरवाल - Sumit Girdharwal
- पृष्ठ : 9
- साइज: 0 MB
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दो शब्द :
यह पाठ "हनुमान वद्वानल स्तोत्र" पर आधारित है, जिसे रावण के भाई विभीषण ने रचित किया है। इस स्तोत्र की शुरुआत भगवान हनुमान की प्रशंसा से होती है, जिसमें उनके गुणों और अपार शक्ति का वर्णन किया गया है। इसके बाद, भगवान हनुमान से निवेदन किया जाता है कि वे सभी रोगों, बुरी स्वास्थ्य और जीवन की सभी परेशानियों को दूर करें। इसके साथ ही, भक्त भगवान हनुमान से सभी प्रकार के भय और संकटों से रक्षा करने और सभी बुरी चीजों से मुक्त करने की प्रार्थना करते हैं। अंत में, भगवान हनुमान से आशीर्वाद, सफलता और अच्छे स्वास्थ्य की भी कामना की जाती है। यह स्तोत्र बहुत ही शुभ और शक्तिशाली माना जाता है। जो कोई भी इसे प्रतिदिन कम से कम एक बार, संपूर्ण ध्यान, श्रद्धा और अडिग विश्वास के साथ पढ़ता है, उसे जीवन में सभी अच्छे चीजें प्राप्त होती हैं। पाठ में भगवान हनुमान की उपासना का भी उल्लेख है, जिसमें उनका ध्यान मंत्र और स्तोत्र का पाठ शामिल है। साथ ही, लेखक ने इस स्तोत्र के प्रभाव को बढ़ाने के लिए कुछ अन्य पुस्तकों की भी जानकारी दी है, जो हनुमान जी और तंत्र-मंत्र से जुड़ी हैं। इसके अलावा, पाठ में डिजिटलाइजेशन के प्रयासों का भी उल्लेख है, जिसमें संस्कृत ग्रंथों को डिजिटल रूप में उपलब्ध कराने की योजना है। पाठक से सहयोग और समर्थन की अपील की गई है, ताकि इस परियोजना को सफल बनाया जा सके। यह पाठ भक्तों के लिए एक प्रेरणादायक और मार्गदर्शक सामग्री प्रस्तुत करता है, जो हनुमान जी की कृपा को प्राप्त करने की इच्छा रखते हैं।
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