संजीवनी विद्या | Sanjeevini Vidya

By: रामचन्द्र वर्मा - Ramchandra Verma


दो शब्द :

इस पाठ में "संजीवनी विद्या" नामक पुस्तक के महत्व और विषयवस्तु का वर्णन किया गया है। यह पुस्तक विशेष रूप से विवाहित युवकों और युवतियों के लिए है, जिसमें वीर्य-संरक्षण, यौन संतोष और दाम्पत्य जीवन को सुगम बनाने की विधियाँ बताई गई हैं। लेखक ने इस पुस्तक के अनुवाद के पीछे की प्रेरणा और अपनी व्यक्तिगत कहानी साझा की है, जिसमें उन्होंने अपने मित्रों और लेखक के साथ संवाद का उल्लेख किया है। पुस्तक का उद्देश्य यह है कि विवाह के बाद भी जीवन में उत्साह और स्वास्थ्य बनाए रखा जा सके। यह बताया गया है कि यदि यौन ऊर्जा का सदुपयोग किया जाए, तो दांपत्य जीवन में प्रेम और आकर्षण बना रहता है। लेखक ने यह भी स्वीकार किया है कि समाज में वासनाओं की पूर्ति के दुष्परिणाम होते हैं और आत्म-संयम का महत्व है। इस पाठ में महात्मा गांधी और अन्य महापुरुषों के उद्धरण शामिल हैं, जो इस विषय को और अधिक महत्वपूर्ण बनाते हैं। लेखक ने यह स्पष्ट किया है कि यौन संबंधों की आवश्यकता को सही ढंग से समझना और नियंत्रित करना आवश्यक है, ताकि व्यक्ति शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रख सके। अंत में, लेखक ने यह बताया है कि यह पुस्तक समाज में वर्तमान परिस्थितियों में अत्यंत आवश्यक है, और इसका अध्ययन करना सभी के लिए लाभकारी होगा।


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