और बाबासाहेब आंबेडकर ने कहा | Aur Babasaheb Ambedkar Ne Kaha

- श्रेणी: Cultural Studies | सभ्यता और संस्कृति Vedanta and Spirituality | वेदांत और आध्यात्मिकता इतिहास / History जातिप्रथा / Caste System जीवनी / Biography दार्शनिक, तत्त्वज्ञान और नीति | Philosophy भारत / India मनोवैज्ञानिक / Psychological संदर्भ पुस्तक / Reference book
- लेखक: डॉ भीमराओ रामजी अम्बेडकर - Dr. Bhimrao Ramji Ambedkar
- पृष्ठ : 263
- साइज: 20 MB
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दो शब्द :
डॉ. भीमराव रामजी अम्बेडकर के विचारों में शिक्षा, स्वास्थ्य, और आर्थिक सुधारों पर जोर दिया गया है। उन्होंने प्राथमिक शिक्षा को अनिवार्य और मुफ्त करने के लिए प्रयास किए हैं, साथ ही छात्रवृत्ति योजनाओं की बात की है। सरकार ने स्वास्थ्य पर बड़े पैमाने पर खर्च करने की योजना बनाई है और नशीले पदार्थों पर कर बढ़ाकर उनकी खपत को कम करने के उपाय किए हैं। अम्बेडकर ने पुलिस और अन्य सरकारी विभागों में स्थानीय लोगों को ऊँचें पदों पर नियुक्त करने की आवश्यकता पर बल दिया है। अम्बेडकर ने ब्रिटिश शासन की आलोचना की है और स्पष्ट किया है कि स्वराज का अर्थ केवल राजनीतिक स्वतंत्रता नहीं है, बल्कि वह आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक उत्थान से भी जुड़ा है। उन्होंने स्वराजवादियों के दृष्टिकोण पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि स्वराज केवल एक औपचारिकता है और वास्तविक स्थिति में आम जनता की गरीबी और असमानताएँ बनी रहती हैं, तो यह किसी काम का नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत की आर्थिक स्थिति अन्य देशों की तुलना में बहुत खराब है और ब्रिटिश नीतियों के कारण इसमें गिरावट आई है। अम्बेडकर ने स्वदेशी उत्पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए स्वराजवादियों की योजनाओं की आलोचना की है। उनके अनुसार, यह केवल पूंजीपतियों को लाभ पहुँचाने वाला होगा और आम जनता का शोषण होगा। अम्बेडकर ने स्वराज के उद्देश्य की गहराई से जांच करने की जरूरत बताई है, ताकि यह समझा जा सके कि क्या यह वास्तव में जनता के कल्याण के लिए है या सिर्फ एक राजनीतिक खेल। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि स्वराज का मतलब केवल सत्ता का हस्तांतरण है, तो यह प्रजा के लिए कोई लाभ नहीं देगा। इस प्रकार, उन्होंने स्वराज की वास्तविकता और उसके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों पर गहन विचार करने की आवश्यकता को रेखांकित किया।
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