भोजपुरी लोक साहित्य का अध्ययन | Bhojpuri Lok Sahitya Ka Adhyayan

- श्रेणी: Cultural Studies | सभ्यता और संस्कृति Hindu Scriptures | हिंदू धर्मग्रंथ जातिप्रथा / Caste System भारत / India साहित्य / Literature
- लेखक: कृष्णदेव उपाध्याय - Krishndev upadhyay
- पृष्ठ : 465
- साइज: 9 MB
- वर्ष: 1960
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दो शब्द :
इस पाठ में लोक-साहित्य, विशेष रूप से भोजपुरी लोक-साहित्य, के संरक्षण और अध्ययन के महत्व पर चर्चा की गई है। लेखक ने बताया है कि किसी देश की वास्तविक संस्कृति उसके लोक-साहित्य में समाहित होती है, इसलिए इसकी रक्षा आवश्यक है। विदेशों में लोक-साहित्य के संरक्षण के लिए कई समितियाँ और संस्थाएँ स्थापित की गई हैं, लेकिन भारत में इस दिशा में ध्यान हाल ही में दिया गया है। लेखक ने भोजपुरी लोक-साहित्य के संरक्षण के लिए कई वर्षों से प्रयासरत हैं। उन्होंने भोजपुरी गीतों, कहानियों और गाथाओं का संग्रह प्रारंभ किया, जिसमें उन्हें अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने भोजपुरी लोक-गीतों को संग्रहित करने के लिए वर्षों मेहनत की और कई हजार गीतों तथा गाथाओं को एकत्र किया है। पाठ में भोजपुरी साहित्य का परिचय, लोक-गीत, लोक-गायन, लोक-कथाएँ और विविध मौखिक साहित्य की चर्चा की गई है। लेखक ने भोजपुरी भाषा और क्षेत्र का विस्तृत विवेचन किया और भोजपुरी साहित्य के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने लोक-गीतों और भारतीय परंपरा के बीच के संबंधों की भी चर्चा की। भोजपुरी लोक-साहित्य की विशेषताओं, मौलिकता और सामाजिक चित्रण पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है। लेखक ने विभिन्न अध्यायों में लोक-गीतों और लोक-कथाओं का वर्गीकरण, उनके रचना-काल का निर्धारण और उनकी विशेषताओं का विवेचन किया है। अंत में, लेखक ने विभिन्न विद्वानों का आभार व्यक्त किया है, जिन्होंने इस शोध कार्य में उनकी सहायता की। इस प्रकार, पाठ भोजपुरी लोक-साहित्य के महत्व, संरक्षण और अध्ययन की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
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