दास बोध | Das Bodh

By: रामदासजी - Ramdasji


दो शब्द :

यह पाठ श्री स्वामी समर्थ रामदासजी के जीवन और उनके विचारों पर आधारित है। रामदासजी, जिन्हें हनुमानजी का अवतार माना जाता है, का जन्म जाम्ब गाँव में हुआ था। उनके पिता सूर्याजी पंत और माता राणूबाई दोनों धार्मिक और भक्तिमान व्यक्ति थे। रामदासजी का बचपन से ही भगवान हनुमान के प्रति विशेष प्रेम था, और उन्होंने युवावस्था में गृहस्थी के बंधनों से दूर रहने का निश्चय किया। जब उनकी माता ने उनका विवाह करने का प्रयास किया, तो रामदासजी ने विवाह से भागकर तपस्या करने का निर्णय लिया। उन्होंने गोदावरी नदी के तट पर कठोर तप किया और भगवान रामचन्द्रजी से उपदेश प्राप्त किया। रामदासजी ने अपने जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन उनकी भक्ति और तपस्या ने उन्हें महान बना दिया। उन्होंने बारह वर्षों तक तीर्थयात्रा की, जिसमें उन्होंने कई पवित्र स्थानों का भ्रमण किया और वहाँ मंदिरों की स्थापना की। उनका उद्देश्य समाज में धर्म और संस्कृति की पुनर्स्थापना करना था। उन्होंने लोगों को प्रेरित किया कि वे अपने देश और धर्म के उत्थान के लिए कार्य करें। रामदासजी का जीवन और उनके विचार आज भी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।


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